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Samudrayaan: समुद्र के नीचे छिपे खजाने की खोज करेगा भारत, जानिए क्या है समुद्रयान मिशन और कब हो रहा लॉन्च?
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: संकल्प सिंह
Updated Wed, 01 Oct 2025 05:27 PM IST
सार
Samudrayaan mission 2025: भारत का नाम उन चुनिंदा देशों की लिस्ट में आ जाएगा, जिनके पास गहरे समुद्र में इंसानों को भेजने की क्षमता है। यह मिशन निकट भविष्य में भारत को ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना सकता है।
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समुद्रयान मिशन
- फोटो : Amar Ujala
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चंद्रयान, मंगलयान मिशनों के जरिए अंतरिक्ष की पहेलियों को जानने के बाद भारत अब समुद्र की गहराइयों में छिपे रहस्यों को जानने के लिए एक मिशन भेजने जा रहा है। इस मिशन का नाम समुद्रयान है। भारत का समुद्रयान मिशन केवल वैज्ञानिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि इसकी मदद से ऊर्जा, खनिज और संसाधनों की खोज भी की जा सकेगी। समुद्र में हजारों मीटर नीचे जाकर वहां की जैव विविधता, इकोलॉजी और खनिज संपदा का अध्ययन इस मिशन के अंतर्गत किया जाएगा।
समुद्रयान मिशन अगर सफल साबित होता है तो भारत का नाम उन चुनिंदा देशों की लिस्ट में आ जाएगा, जिनके पास गहरे समुद्र में इंसानों को भेजने की क्षमता है। यह मिशन निकट भविष्य में भारत को ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना सकता है।
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समुद्रयान मिशन
- फोटो : AdobeStock
क्या है समुद्रयान मिशन
यह भारत का पहला मानव संचालित डीप सी मिशन है। इस मिशन के अंतर्गत मत्स्य 6000 नाम की पनडुब्बी में तीन वैज्ञानिकों को समुद्र की गहराइयों में भेजा जाएगा। पनडुब्बी में कई तरह के आधुनिक उपकरण लगे होंगे। साल 2021 में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने पहला समुद्रयान मिशन लॉन्च किया था।
समुद्रयान मिशन की लागत करीब 4077 करोड़ रुपये है। इसके अलावा मिशन के लिए 600 करोड़ रुपये के अतरिक्त बजट को भी मंजूरी दी गई है। इस साल के अंतिम में समुद्र में करीब 600 से ज्यादा मीटर की गहराई में ट्रायल किया जाएगा।
वहीं अगले साल 2026 में समुद्र की 3 हजार से 6 हजार मीटर की गहराइयों में 3 वैज्ञानिकों को समुद्रयान मिशन के जरिए भेजने की तैयारी की जा रही है। अनुमान है कि हिंद महासागर में 38 करोड़ टन पॉलीमेटेलिक नॉड्यूल्स (तांबा, निकल, कोबाल्ट, मैंगनीज) हो सकते हैं।
इस मिशन की सफलता से पॉलीमेटेलिक नॉड्यूल्स प्राप्त करने की संभावना बढ़ेगी। इसके अलावा विभिन्न तरीकों के खनिजों की तलाश की जा सकेगी। मिशन की सफलता के बाद अमेरिका, फ्रांस, जापान, रूस, चीन के बाद भारत की गिनती दुनिया के छठे देश में होगी जो गहरे समुद्र में मानव मिशन भेज सकने में सक्षम है।
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