Rent Agreement Checklist Before Signing: देश के बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक किराए के मकान में रहने वाले लाखों लोगों के लिए रेंट एग्रीमेंट एक बेहद जरूरी कानूनी दस्तावेज होता है। नया घर या कमरा लेते समय मकान मालिक और किराएदार के बीच कई बातों पर मौखिक सहमति तो हो जाती है, लेकिन अक्सर लोग जल्दबाजी में बिना पढ़े ही रेंट एग्रीमेंट पर साइन कर देते हैं।
छोटी सी लापरवाही के कारण बाद में सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस मिलने या समय से पहले घर खाली करने को लेकर भारी विवाद खड़ा हो जाता है। आइए इस लेख में जानते हैं कि किसी भी एग्रीमेंट पर दस्तखत करने से पहले किन चार अहम बातों को ध्यान से जरूर चेक करना चाहिए।
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मासिक किराया, सिक्योरिटी डिपॉजिट
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मासिक किराया, सिक्योरिटी डिपॉजिट
- एग्रीमेंट पर साइन करने से पहले हमेशा यह अच्छी तरह जांच लें कि महीने का किराया कितना तय हुआ है और सुरक्षा के तौर पर एडवांस सिक्योरिटी राशि कितनी जमा की जा रही है।
- इसके साथ ही, अगर बात हुई है तो एग्रीमेंट में यह भी साफ-साफ लिखा होना चाहिए कि हर साल किराए में कितने प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाएगी, ताकि भविष्य में कोई विवाद न हो।
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एग्रीमेंट की अवधि और नोटिस पीरियड के स्पष्ट नियम
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एग्रीमेंट की अवधि और नोटिस पीरियड के स्पष्ट नियम
- दस्तावेज में यह तारीख और अवधि बिल्कुल स्पष्ट होनी चाहिए कि यह एग्रीमेंट कितने महीनों या 11 महीनों के लिए बन रहा है।
- इसके अलावा, अगर मकान मालिक या किराएदार को कभी घर खाली करना पड़े, तो कितने दिन पहले नोटिस देना होगा और उस दौरान नियमों का पालन कैसे किया जाएगा, इसकी पूरी जानकारी भी जरूर पढ़ लें।
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रखरखाव शुल्क और बिजली-पानी के बिलों की जिम्मेदारी
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रखरखाव शुल्क और बिजली-पानी के बिलों की जिम्मेदारी
- फ्लैट या कमरे का मासिक मेंटेनेंस चार्ज, पानी का बिल और बिजली का बिल कौन भरेगा, यह बात एग्रीमेंट में लिखित रूप से दर्ज होनी चाहिए।
- कई बार लोग इन खर्चों को लेकर बाद में उलझ जाते हैं, इसलिए पहले ही यह तय कर लेना समझदारी होती है कि यह राशि किराए में शामिल है या अलग से चुकानी होगी।
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संपत्ति में टूट-फूट और मरम्मत की जिम्मेदारी के नियम
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संपत्ति में टूट-फूट और मरम्मत की जिम्मेदारी के नियम
- घर में रहने के दौरान अगर दीवारों की पपड़ी उखड़े, नल खराब हो या बिजली की फिटिंग में कोई तकनीकी समस्या आए, तो उसकी मरम्मत का खर्च कौन उठाएगा।
- एग्रीमेंट में इस बात का स्पष्ट जिक्र होना चाहिए कि सामान्य टूट-फूट की जिम्मेदारी मकान मालिक की होगी या किराएदार की, ताकि एग्रीमेंट खत्म होने पर सिक्योरिटी रिफंड के वक्त कोई परेशानी न आए।