Airplane Bird Strike Test Details In Hindi: जब भी किसी हवाई जहाज को उड़ान भरनी होती है तो उससे पहले उसको कई टेस्ट से गुजरना पड़ता है। ये टेस्ट सफलतापूर्वक पूरे होने के बाद ही किसी प्लेन को उड़ान की इजाजत दी जाती है। वहीं, अहमदाबाद में एअर इंडिया की फ्लाइट के साथ जो हुआ उसने लगभग हर व्यक्ति के मन में डर बैठा दिया है।
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सवाल हवाई जहाज के सेफ्टी टेस्ट पर भी खड़ा हो रहा है? ऐसे में क्या आप चिकन गन टेस्ट के बारे में जानते हैं? शायद नहीं, पर आपको जानकर हैरानी होगी कि इसमें जिंदा मुर्गे को प्लेन के टर्बाइन इंजन में डाला जाता है। तो चलिए जानते हैं क्यों हवाई जहाज के टर्बाइन इंजन में जिंदा मुर्गा डाला जाता है। आप आगे इस बारे में जान सकते हैं...
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हवाई जहाज में जिंदा मुर्गा डालने के पीछे क्या है वजह?
- फोटो : Adobe Stock
क्यों डाला जाता है प्लेन के टर्बाइन इंजन में मुर्गा?
- जब भी कोई हवाई जहाज एक तय ऊंचाई पर उड़ रहा होता है तो उसमें किसी पक्षी या चिड़िया के टकराने या फंसने की संभावनाएं काफी ज्यादा होती हैं। वहीं, ऐसी घटनाएं भी होती रहती हैं। समझिए कि अगर कोई चिड़िया या कोई पक्षी प्लेन की विंड शील्ड यानी सामने के शीशे से टकरा जाए या इंजन में घुस जाए तो इससे प्लेन को नुकसान पहुंच सकता है और कई बार प्लेन दुर्घटनाग्रस्त भी हो जाता है। इसलिए ही प्लेन के टर्बाइन इंजन में जिंदा मुर्गा डाला जाता है।
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किया जाता है चिकन गन टेस्ट
- प्लेन जब हवा में तेज रफ्तार से उड़ता है तो उससे कोई चिड़िया या पक्षी टकराने पर प्लेन को क्या नुकसान होगा। ये जानने के लिए चिकन गन टेस्ट किया जाता है और इस टेस्ट से ही पता चलता है कि प्लेन सुरक्षा की दृष्टि से उड़ान के लिए तैयार है या नहीं है।
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- इसके लिए चिकन गन मशीन (हवा की तोप जो Compressed Air Cannon होता है) से प्लेन के टर्बाइन इंजन में, विंडशील्ड में और विंग में जिंदा मुर्गे को उस रफ्तार से दागा जाता है जितनी रफ्तार से असली पक्षी उड़ते हुए हवा में प्लेन से टकरा सकता है।
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इसलिए डाला जाता है जिंदा मुर्गा
- इसके बाद ये देखा जाता है कि इस मुर्गे से प्लेन को कितना नुकसान पहुंचा है। क्या प्लेन उड़ने की स्थिति में है या नहीं है? क्या मुर्गा इंजन के अंदर तक पहुंच गया है और क्या इंजन को नुकसान पहुंचा है आदि? ऐसे में समझा जा सकता है कि ये टेस्ट कितना जरूरी होता है। इसमें जिंदा मुर्गे का इस्तेमाल इसलिए होता है क्योंकि जिंदा मुर्गे का मास, पंख और उसके टिशु से ही बर्ड हिट से होने वाले नुकसान का पता लगाया जा सकता है।