आजकल ज्यादातर स्कूलों में फीस ऑनलाइन जमा करने की सुविधा मिल जाती है। घर बैठे कुछ मिनट में बच्चे की फीस जमा हो जाती है और मोबाइल पर रसीद भी मिल जाती है। लेकिन कई माता-पिता फीस भरने के बाद सिर्फ रसीद का स्क्रीनशॉट लेकर रख लेते हैं। कुछ समय बाद वही स्क्रीनशॉट ढूंढना मुश्किल हो जाता है। वहीं कभी भुगतान कटने के बाद स्कूल के रिकॉर्ड में फीस जमा नहीं दिखती। ऐसे में सिर्फ स्क्रीनशॉट के बजाय भुगतान से जुड़ी पूरी जानकारी संभालकर रखना ज्यादा काम का है। तो आइए विस्तार से बताते हैं।
बच्चे की फीस ऑनलाइन भरती हैं? रसीद का स्क्रीनशॉट लेकर छोड़ने के बजाय ये जानकारी संभालें
Online School Fee Payment: बच्चे की स्कूल फीस ऑनलाइन जमा करने के बाद सिर्फ रसीद का स्क्रीनशॉट लेकर छोड़ना ठीक नहीं है। फीस की रसीद, ट्रांजैक्शन आईडी, भुगतान की तारीख, रकम, बच्चे की जानकारी और स्कूल से मिला कन्फर्मेशन संभालकर रखें। आगे फीस को लेकर कोई दिक्कत हो तो यही जानकारी काम आ सकती है।
ट्रांजैक्शन आईडी जरूर संभालें
फीस जमा करने के बाद मिलने वाली रसीद या पेमेंट कन्फर्मेशन में ट्रांजैक्शन आईडी या रेफरेंस नंबर दिया हो सकता है। इसे जरूर सुरक्षित रखें। डिजिटल पेमेंट में ट्रांजैक्शन हिस्ट्री से भुगतान की जानकारी दोबारा देखी जा सकती है। एनपीसीआई के बिल पेमेंट मानकों में भी डिजिटल रसीद पर ट्रांजैक्शन रेफरेंस आईडी, कंज्यूमर आईडी, रकम और भुगतान की तारीख जैसी जानकारी शामिल करने की बात कही गई है।
बच्चे का नाम और फीस की जानकारी भी रखें
रसीद में बच्चे का नाम, क्लास, रोल नंबर या स्टूडेंट आईडी जैसी जानकारी हो तो उसे भी संभालकर रखें। साथ ही यह लिखकर रख सकती हैं कि किस महीने या किस टर्म की फीस जमा की गई है। इससे बाद में किसी खास भुगतान को ढूंढना आसान रहेगा।
कितनी फीस जमा की, ये भी साफ रखें
फीस की रकम और भुगतान की तारीख भी नोट कर लें। अगर स्कूल की फीस में ट्यूशन फीस के साथ ट्रांसपोर्ट, एक्टिविटी या दूसरी फीस शामिल है तो रसीद में उसका विवरण भी सुरक्षित रखें। इससे बाद में फीस को लेकर कोई अंतर सामने आए तो जानकारी मिलाना आसान होगा।
बैंक या यूपीआई का रिकॉर्ड भी न मिटाएं
जिस बैंक अकाउंट या यूपीआई से फीस भरी है, उसकी ट्रांजैक्शन हिस्ट्री भी संभालकर रखें। यूपीआई ऐप में ट्रांजैक्शन हिस्ट्री देखी जा सकती है। अगर स्कूल की वेबसाइट पर पेमेंट हिस्ट्री उपलब्ध है तो वहां से भी रिकॉर्ड चेक कर लें।
एक अलग फोल्डर बनाकर रखें
हर महीने फीस की रसीद के स्क्रीनशॉट अलग-अलग रखने के बजाय मोबाइल या कंप्यूटर में बच्चे के नाम से एक फोल्डर बना लें। उसमें फीस की रसीद और जरूरी पेमेंट डिटेल रख सकती हैं। साल खत्म होने पर भी इन्हें तुरंत डिलीट न करें। स्कूल बदलने, फीस को लेकर विवाद या किसी रिकॉर्ड की जरूरत पड़ने पर पुरानी जानकारी काम आ सकती है।
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