अगर कोई महिला किसी वजह से ससुराल छोड़कर मायके आ गई है और उसके गहने, कपड़े या जरूरी दस्तावेज वहीं रह गए हैं तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। अपने सामान को वापस लेने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं। खासकर शादी के समय मिले गहने और दूसरी निजी चीजों को लेकर महिला को अपने अधिकारों की जानकारी होना जरूरी है। तो आइए जानते हैं कि ऐसे स्थिति में आपके क्या अधिकार हैं।
ससुराल में गहने और जरूरी कागज छोड़कर आ गई हैं? वापस लेने के लिए ऐसे उठाएं कदम
Stridhan Rights: अगर कोई महिला ससुराल से मायके आ गई है और उसके गहने, कपड़े या जरूरी दस्तावेज वहीं रह गए हैं तो उन्हें वापस लेने के लिए पहले लिखित तौर पर सामान मांगना बेहतर होता है। सामान न मिलने पर पुलिस में शिकायत और जरूरत पड़ने पर कानूनी मदद ली जा सकती है।
सबसे पहले सामान की पूरी लिस्ट बनाएं
सबसे पहले यह लिख लें कि ससुराल में आपका कौन-कौन सा सामान रखा है। इसमें गहने, कपड़े, बैंक से जुड़े कागज, शैक्षणिक प्रमाणपत्र, पासपोर्ट, आधार या दूसरी जरूरी चीजें शामिल हो सकती हैं। गहनों की बात हो तो उनकी संख्या, डिजाइन और अगर बिल या फोटो मौजूद है तो उसकी जानकारी भी संभालकर रखें।
पहले लिखित तौर पर सामान मांगें
सामान लेने के लिए सीधे विवाद करने के बजाय पति या ससुराल वालों को लिखित तौर पर सामान वापस करने के लिए कह सकती हैं। मैसेज, ईमेल या किसी दूसरे लिखित माध्यम से अपनी चीजों की पूरी जानकारी देते हुए उन्हें वापस करने की बात कहें। इससे बाद में यह भी दिखाया जा सकता है कि आपने अपना सामान वापस मांगा था।
शादी के समय महिला को मिले गहने और दूसरी निजी चीजें उसके स्त्रीधन का हिस्सा हो सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में स्त्रीधन को महिला की संपत्ति माना गया है और कुछ मामलों में अदालत ने ससुराल पक्ष के पास रखे गहने वापस करने से जुड़े मामलों पर भी सुनवाई की है। इसलिए केवल यह कह देना कि गहने ससुराल में रखे हैं, अपने आप में उनका मालिकाना हक ससुराल वालों को नहीं देता।
सामान वापस न मिले तो क्या करें?
अगर बार-बार मांगने के बाद भी सामान वापस नहीं किया जाता है तो महिला पुलिस में शिकायत कर सकती है। शिकायत में यह साफ-साफ बताना चाहिए कि कौन-कौन सी चीजें ससुराल में रह गई हैं और उन्हें वापस क्यों नहीं किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर वकील की मदद से आगे कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। घरेलू हिंसा की स्थिति में महिला अदालत से अपने स्त्रीधन और दूसरे सामान से जुड़े संरक्षण के लिए भी मदद मांग सकती है। घरेलू हिंसा कानून में मजिस्ट्रेट को स्त्रीधन और कुछ दूसरी संपत्तियों की सुरक्षा के लिए आदेश देने की शक्ति दी गई है।
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