Indian Army Day 2024: 15 जनवरी का दिन भारत के इतिहास में काफी महत्वपूर्ण है। इसी दिन 1949 में फील्ड मार्शल केएम करियप्पा ने जनरल फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना की कमान ली थी। इसी वजह से हर साल 15 जनवरी को भारतीय सेना दिवस के रूप में मनाया जाता है। जनरल फ्रांसिस बुचर भारत के अंतिम ब्रिटिश कमांडर इन चीफ थे। वर्तमान में भारतीय सेना की गिनती दुनिया की बड़ी सेनाओं में की जाती है। तेजी से बदलती दुनिया में भारतीय सेना भी आधुनिक हो रही है। समय के साथ-साथ नए उपकरण, आधुनिक हथियार और सैन्य परिवहन भारतीय सेना में शामिल किए जा रहे हैं। इतिहास में भारतीय सेना ने कई महत्वपूर्ण लड़ाइयां लड़ी हैं। भारत पाकिस्तान के बीच अब तक कुल 4 बार युद्ध हुए हैं। इन सभी युद्धों में भारत ने जीत हासिल की है।
Indian Army Day 2024: ये हैं भारतीय सेना की चार सबसे बड़ी उपलब्धियां
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1947-48 का कश्मीर युद्ध
आजादी के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर युद्ध हुआ। कश्मीर को कब्जा करने के उद्देश्य से पाकिस्तान वहां पर हमला कर देता है। कश्मीर के तत्कालीन शासक हरि सिंह के अनुरोध पर भारतीय सेना कश्मीर में जाती है। इसके बाद भारतीय सेना कश्मीर के बड़े हिस्से से पाकिस्तानी सेना को पीछे हटने पर मजबूर कर देती है। अंत में संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुरोध पर इस युद्ध को युद्धविराम के साथ समाप्त किया जाता है।
1965 का भारत पाकिस्तान युद्ध
इस युद्ध में भारत ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया था। ये वह समय था जब पंडित जवाहर लाल नेहरू की मृत्यु हो चुकी थी और लाल बहादुर शास्त्री भारत के नए प्रधानमंत्री बने थे। ऐसे में पाकिस्तान ऑपरेशन जिब्राल्टर के अंतर्गत कश्मीर में अपने सैन्य ऑपरेशन की शुरुआत कर देता है। इसके बाद भारतीय सेना जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तानी सेना पर हमला बोलती है। इस जवाबी हमले में पाकिस्तानी सेना पीछे हटने पर मजबूर हो जाती है। युद्ध के खत्म होने के बाद दोनों देश ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर करते हैं। इस समझौते में दोनों देशों ने युद्धविराम का पालन करने और कश्मीर विवाद को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने का वादा किया था।
1971 का बांग्लादेश युद्ध
1971 के भारत बांग्लादेश युद्ध को बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के रूप में भी जाना जाता है। तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान ( वर्तमान में बांग्लादेश) में आंतरिक विद्रोह के कारण बड़े पैमाने पर बांग्लादेशी भारत में शरण लेने पर मजबूर हो रहे थे। पाकिस्तान द्वारा तख्तापलट किए जाने के बाद पूर्वी पाकिस्तान में उस समय स्थिति काफी गंभीर हो गई थी। इस तख्तापलट के बाद वहां पर विद्रोह की शुरुआत हो जाती है। विद्रोही लोग मिलकर मुक्तिवाहिनी का गठन करते हैं। इसके बाद पाकिस्तानी सेना के खिलाफ विद्रोह करने वाली मुक्ति वाहिनी का समर्थन करते हुए भारत, पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर देता है। युद्ध का परिणाम यह निकलता है कि पाकिस्तान से अलग होकर बांग्लादेश एक स्वतंत्र देश बन जाता है।