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पति के नाम है घर तो क्या पत्नी को रहने का अधिकार नहीं? जानें घरेलू हिंसा कानून में महिलाओं के अधिकार

Mon, 28 Sep 2026 09:58 AM IST
दीक्षा पाठक यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला Published by: दीक्षा पाठक Updated Mon, 28 Sep 2026 09:58 AM IST
सार

Husband Owns the House: शादी के बाद जिस घर में पत्नी पति के साथ घरेलू रिश्ते में रह रही है, वह कुछ परिस्थितियों में कानून की नजर में ‘साझा घर’ माना जा सकता है। ऐसे घर पर पत्नी का रहने का अधिकार सिर्फ इसलिए खत्म नहीं हो जाता कि मकान पति के नाम है। घरेलू हिंसा कानून में महिला के निवास के अधिकार को खास सुरक्षा दी गई है। 

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Husband Owns the House Does a Wife Have the Right to Live There Know the Law
ससुराल का घर पति के नाम है? - फोटो : AI

अक्सर महिलाओं के मन में यह सवाल रहता है कि अगर घर उनके पति के नाम है तो क्या पति उन्हें उस घर से निकाल सकता है? खासकर घरेलू विवाद या हिंसा की स्थिति में यह सवाल और भी अहम हो जाता है। कानून में इसका जवाब सिर्फ घर के मालिकाना हक से तय नहीं होता। घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005 में महिला के साझा घर में रहने के अधिकार की बात कही गई है। तो आइए विस्तार से जानते हैं।

Husband Owns the House Does a Wife Have the Right to Live There Know the Law
ससुराल का घर पति के नाम है? - फोटो : freepik

सिर्फ पति के नाम होने से अधिकार खत्म नहीं
कानून के मुताबिक घरेलू रिश्ते में रहने वाली महिला को साझा घर में रहने का अधिकार हो सकता है, भले ही उस घर में उसका अपना कोई मालिकाना हक या नाम न हो। यानी केवल यह कहना कि मकान पति के नाम है, अपने आप पत्नी के रहने के अधिकार को खत्म नहीं करता।

साझा घर किसे माना जाता है?
साझा घर का मतलब केवल ऐसा मकान नहीं है जो पति और पत्नी दोनों के नाम हो। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि जिस घर में महिला घरेलू रिश्ते के दौरान रह चुकी है और जहां उसका रहना सिर्फ थोड़े समय के लिए नहीं बल्कि स्थायी घरेलू जीवन का हिस्सा रहा है, वह परिस्थितियों के आधार पर साझा घर हो सकता है। यह घर पति के नाम का हो सकता है या कुछ मामलों में संयुक्त परिवार का घर भी हो सकता है।

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ससुराल का घर पति के नाम है? - फोटो : Adobe Stock

क्या पति पत्नी को घर से निकाल सकता है?
घरेलू हिंसा कानून की धारा 17 के तहत महिला को साझा घर से रहने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। कानून में यह भी कहा गया है कि महिला को साझा घर से बाहर नहीं किया जा सकता, सिवाय कानून में तय प्रक्रिया के। यानी पति अपनी मर्जी से पत्नी को घर से निकाल दे, ऐसा अधिकार सिर्फ मकान के मालिक होने से नहीं मिल जाता।

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ससुराल का घर पति के नाम है? - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

जरूरत पड़ने पर कोर्ट से मिल सकता है निवास का आदेश
अगर महिला घरेलू हिंसा का सामना कर रही है और उसे घर से निकालने की कोशिश की जा रही है तो वह कानूनी मदद ले सकती है। घरेलू हिंसा कानून के तहत मजिस्ट्रेट परिस्थितियों के अनुसार निवास संबंधी आदेश दे सकता है। कुछ मामलों में महिला के लिए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था का आदेश भी दिया जा सकता है।

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ससुराल का घर पति के नाम है? - फोटो : अमर उजाला

एक जरूरी बात समझना भी जरूरी है
इसका मतलब यह नहीं है कि पत्नी को पति की संपत्ति में अपने आप मालिकाना हक मिल जाता है। रहने का अधिकार और संपत्ति का मालिकाना हक दो अलग-अलग बातें हैं। किसी खास मामले में घर की स्थिति, महिला का वहां रहना, घरेलू रिश्ता और विवाद की परिस्थितियां देखी जाती हैं। इसलिए ऐसी स्थिति में स्थानीय वकील या कानूनी सहायता केंद्र से सलाह लेना बेहतर रहता है।


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