Digital Personal Data Protection Bill: आज के इस दौर को डिजिटल क्रांति की संज्ञा दी जाए तो गलत नहीं होगा। इस नए युग में सूचना तकनीक ने भौतिक संसार के समानांतर एक ऐसी डिजिटल दुनिया खड़ी की है, जहां हम घर बैठे ही अपनी उंगलियों के सहारे पूरी दुनिया का जायजा ले पा रहे हैं। अब हम एक चौथी औद्योगिक क्रांति में कदम रख चुके हैं। यह दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम कंप्यूटिंग का है। एक तरफ जहां इस डिजिटल दुनिया में हमारे कई काम काफी आसान हो गए हैं। वहीं उसी के समानांतर इसके कई बड़े खतरे भी सामने निकलकर आ रहे हैं। आज के समय इंटरनेट की दुनिया में हमारे निजी डाटा का इस्तेमाल करके हमारी सोचने समझने की शक्ति को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में निजी डाटा की सुरक्षा को लेकर बीते लंबे समय से बहस चलती आ रही है। इसी वजह से देश में कई पॉलिसी संस्थाओं ने निजी डाटा संरक्षण के मुद्दे पर कानून बनाने की मांग की थी।
क्या है संसद में पेश होने जा रहा डाटा प्रोटेक्शन बिल? जानिए कैसे रखेगा आपकी निजिता को सुरक्षित
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क्या है डाटा प्रोटेक्शन बिल
इस बिल के पास होने के बाद यह लोगों के अधिकारों और कर्तव्यों को तय करने का काम करेगा। इसके अलावा इसके आने से डाटा फ्रॉड पहले की तुलना में अच्छे से नियंत्रित किए जा सकेंगे। इस कानून के लागू होने के बाद लोग अपने डाटा कलेक्शन, स्टोरेज और प्रोसेसिंग के बारे में डिटेल मांग सकेंगे। अगर यह बिल कानून की शक्ल लेता है। ऐसे में इसका उद्देश्य यूजर्स केे व्यक्तिगत डाटा को सुरक्षित रखना होगा।
डाटा प्रोटेक्शन बोर्ड का गठन करेगी सरकार
इस बिल के पास होने के बाद सरकार एक खास तरह के डाटा प्रोटेक्शन बोर्ड का गठन करेगी। इस बोर्ड का काम प्राइवेसी से जुड़े मुद्दों और दोनों पार्टियों के बीच होने वाले मतभेदों को हल करना होगा। इस कानून का उल्लंघन करने पर संबंधित प्लेटफॉर्म को डाटा प्रोटेक्शन बोर्ड के पास जाना होगा। बोर्ड घटना की जांच करके कानूनी कार्रवाई कर सकता है या फिर सेटलमेंट फीस लेगा। इसके अलावा डाटा प्रोटेक्शन बिल में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि डाटा ब्रीच होने की सूरत में संबंधित इकाइयों को इसकी जानकारी पारदर्शी और न्यायसंगत ढंग से देनी होगी।
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पिछले साल केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मानसून सत्र तक डाटा प्रोटेक्शन बिल को कानून की शक्ल देने की बात कही थी। वहीं अब मोदी कैबिनेट ने 5 जुलाई को डाटा प्रोटेक्शन बिल के मसौदे को मंजूरी दे दी है।
डाटा प्रोटेक्शन बिल को मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। इस विधेयक के मसौदे में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि अगर बिल के पास होने के बाद कोई इसका उल्लंघन करते हुए पाया गया, तो उस पर 250 करोड़ रुपये का जुर्माना लगेगा।