बच्चे का पढ़ने बैठते ही इधर-उधर देखना या टीवी की तरफ बार-बार नजर जाना देखकर कई माता-पिता परेशान हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि बच्चा पढ़ाई में मन नहीं लगा रहा या जानबूझकर ध्यान नहीं दे रहा। लेकिन कई बार इसकी वजह बच्चे की इच्छा नहीं, बल्कि उसके आसपास का माहौल होता है। अगर पढ़ाई की जगह पर ऐसी चीजें रखी हैं जिन पर बच्चे की नजर बार-बार जाती है तो उसका ध्यान टूटना स्वाभाविक है। तो आइए जानते हैं कि बच्चे के फोकस को कैसे बढ़ाया जाए।
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पढ़ाई में मन नहीं लगता तो बच्चे को न डांटें
- फोटो : Adobe Stock
टीवी रखें बंद
सबसे पहले बात टीवी की। अगर पढ़ाई वाली जगह से टीवी साफ दिखाई देता है तो टीवी बंद होने के बावजूद बच्चे की नजर उधर जा सकती है। घर में कोई दूसरा व्यक्ति टीवी देख रहा हो तो आवाज और स्क्रीन की हलचल बच्चे का ध्यान और ज्यादा खींच सकती है। इसलिए कोशिश करें कि पढ़ते समय बच्चे की कुर्सी टीवी की तरफ न हो। संभव हो तो पढ़ाई की जगह ऐसी रखें जहां से टीवी दिखाई ही न दे।
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पढ़ाई में मन नहीं लगता तो बच्चे को न डांटें
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मोबाइल को भी रखें दूर
मोबाइल भी ध्यान भटकाने वाली बड़ी वजह बन सकता है। अगर बच्चे के पास मोबाइल रखा है और उसमें बार-बार सूचना आने की आवाज सुनाई देती है तो वह पढ़ाई छोड़कर उसे देखने की कोशिश कर सकता है। पढ़ाई के समय मोबाइल को बच्चे से दूर रखना बेहतर रहता है। अगर पढ़ाई के लिए मोबाइल जरूरी है तो गैर जरूरी सूचनाएं बंद की जा सकती हैं।
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कमरे की खिड़कियां रखें बंद
कमरे में रखे खिलौने भी छोटे बच्चों का ध्यान खींच सकते हैं। पढ़ाई की मेज के सामने खिलौने, गेम या पसंद की दूसरी चीजें रखी हों तो बच्चा बार-बार उनकी तरफ देख सकता है। इसलिए पढ़ाई के समय मेज पर सिर्फ जरूरी किताबें, कॉपी और पेन जैसी चीजें रखना ज्यादा सही रहता है। खिड़की के बाहर लगातार होने वाली हलचल भी बच्चे का ध्यान तोड़ सकती है। सड़क पर आते-जाते लोग, गाड़ियां या बाहर खेलने वाले बच्चे आसानी से नजर में आते हैं। अगर संभव हो तो पढ़ाई की जगह ऐसी रखें जहां बाहर की हलचल कम दिखाई दे।
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कम रखें हलचल
इसके अलावा कमरे में बहुत ज्यादा सामान, तेज आवाज, लगातार बातचीत या तेज संगीत भी पढ़ाई में रुकावट डाल सकता है। इसका मतलब यह नहीं कि बच्चे के लिए पूरा कमरा बिल्कुल शांत होना जरूरी है, लेकिन पढ़ाई के समय आसपास की अनावश्यक हलचल कम रखना मददगार हो सकता है। इसलिए बच्चा बार-बार टीवी की तरफ देखे तो तुरंत उसे डांटने के बजाय एक बार उसके पढ़ाई वाले कमरे और आसपास की चीजों पर नजर डालें। कई बार छोटी-सी जगह बदलने या कुछ सामान हटाने से बच्चे का ध्यान पढ़ाई पर टिकने लगता है।
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