2025 New MVAG Guidelines: आज के समय में लगभग हर किसी को अपने गंतव्य तक पहुंचने की जल्दी रहती है। इसके लिए लोग अपने वाहन से यात्रा करते हैं या फिर लोग बस, मेट्रो छोड़ कैब से भी यात्रा करते हैं। पर क्या आप जानते हैं सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइन 2025 जारी कर दी गई है।
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इसके मुताबिक, अब कैब कंपनियां पीक ऑवर्स में ग्राहकों से बेस फेयर से दोगुना तक चार्ज ले सकेगी। जबकि, अब तक ये 1.5 गुना तक लिया जाता था। ऐसे में जाहिर है कि कैब से यात्रा करने वाले लोगों की जेब पर असर पड़ता हुआ नजर आएगा। इसलिए इस नियम से जुड़े जो भी सवाल आपके मन में चल रहे हैं, वो आप यहां जान सकते हैं। तो चलिए जानते हैं इस नए नियम में क्या है। आप आगे इस बारे में जान सकते हैं...
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कैब कंपनियां पीक ऑवर्स में कितना किराया लें सकेंगी?
- फोटो : Adobe Stock
क्या है ये नया नियम?
- सरकार ने मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस 2025 जारी की है जिसके मुताबिक, अब ओला, उबर और रैपिडो जैसी कैब कंपनियां पीक ऑवर्स में ग्राहकों से बेस किराए का दोगुने तक किराया चार्ज किया जा सकेगा। हालांकि, पहले ये सीमा 1.5 गुना तक थी।
- ये भी जान लें कि अगर ड्राइवर बिना सही कारण किसी की राइड कैंसिल करता है तो उस पर बेस किराए का 10 प्रतिशत जुर्माना लगेगा। वहीं, सरकार ने इस नए नियम को अगले 3 महीने के भीतर लागू करने की सलाह दी है और साथ ही ड्राइवरों के लिए 5 लाख रुपये तक का बीमा कवर अनिवार्य है।
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कैब कंपनियां पीक ऑवर्स में कितना किराया लें सकेंगी?
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क्या होता है पीक ऑवर्स और कब से लागू होगी गाइडलाइन?
- अगर आप ये सोच रहे हैं कि ये पीक ऑवर्स होते क्या हैं? तो जान लें कि जब ट्रैफिक जाम की वजह से, खराब मौसम की वजह आदि से कैब की मांग बढ़ जाती है, तो ऐसे समय को पीक ऑवर्स कहा जाता है। वहीं, सरकार ने इस नई गाइडलाइन को अगले तीन महीने के भीतर लागू करने की सलाह दी है।
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क्या होता है बेस किराया और कौन करता है इसे तय?
- बेस किराया वो तय राशि होती है जो किसी वाहन, बाइक, कैब आदि की एक निश्चित दूरी या समय के लिए ली जाती है। ये भी जान लें कि इस बेस किराए को राज्य सरकारें अपने-अपने प्रदेश के लिए तय करती हैं।
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क्या नॉन पीक ऑवर्स में भी देना होगा दोगुना तक किराया?
- अगर आप ये सोच रहे हैं कि क्या पीक ऑवर्स की तरह नॉन पीक ऑवर्स में भी दोगुना तक किराया देना होगा, तो जान लें कि नए नियमों के मुताबिक, नॉन पीक ऑवर्स में किराया बेस कम से कम 50 प्रतिशत होगा ताकि ड्राइवरों की आय बनी रहे। इसे ऐसे समझें जैसे, 2 किलोमीटर की बाइक टैक्सी राइड का बेस प्राइस 100 रुपये है तो नॉन पीक ऑवर्स में कम से कम ये 50 रुपये ही चार्ज किया जाएगा।