US vs China: वैक्यूम क्लीनर से लेकर CCTV कैमरा तक... चीन के गैजेट्स से क्यों डरा अमेरिका? समझिए पूरा मामला
US Vs China Tech War:
क्या घर साफ करने वाला रोबोट या Wi-Fi राउटर से भी आपकी निजी जानकारी को खतरा हो सकता है? अमेरिका का दावा है कि कई स्मार्ट गैजेट राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। आखिर इन डिवाइस में ऐसा क्या है, जिसने अमेरिका की टेंशन बढ़ा दी है, जानिए पूरी कहानी।

क्या आप कभी सोच सकते हैं कि आपके घर का फर्श चमकाने वाला रोबोट वैक्यूम क्लीनर या कोने में रखा वाई-फाई राउटर (Wi-Fi router) आपकी जासूसी कर सकता है? बाहर से देखने पर यह किसी हॉलीवुड फिल्म की कहानी लग सकती है, लेकिन तकनीकी दुनिया की सच्चाई यही है। अमेरिका और चीन के बीच टेक्नोलॉजी में आगे निकलने की भयंकर होड़ के बीच, अब अमेरिका की ट्रंप (Trump) सरकार ने चीनी स्मार्ट गैजेट्स पर एक के बाद एक बैन लगाने शुरू कर दिए हैं। इस बार निशाने पर सिर्फ स्मार्टफोन या टेलीकॉम नेटवर्क नहीं हैं, बल्कि वे गैजेट्स हैं जो आपके बेडरूम और ड्रॉइंग रूम तक पहुंच चुके हैं।

चाइनीज गैजेट्स पर कड़ा एक्शन
- अमेरिका के संचार नियामक, फेडरल कम्यूनिकेशन कमिशन (FCC) ने हाल ही में नए सुरक्षा नियम लागू किए हैं। इन सख्त नियमों के तहत चीन सहित कुछ अन्य देशों में निर्मित आधुनिक स्मार्ट उपकरणों को अब अमेरिकी बाजार में एंट्री नहीं मिलेगी।
- इस ब्लैकलिस्ट में घर की सफाई करने वाले रोबोट वैक्यूम क्लीनर, ह्यूमनॉयड रोबोट, रोबो डॉग, स्मार्ट वाई-फाई राउटर, पावर इन्वर्टर और इंटरनेट से जुड़े कई एडवांस एआई गैजेट्स शामिल किए गए हैं। FCC का कहना है कि ये उपकरण सिर्फ मशीनें नहीं रह गए हैं, बल्कि भारी मात्रा में डेटा इकट्ठा करने वाले नेटवर्क डिवाइस हैं। अगर यह संवेदनशील डेटा किसी विदेशी सरकार (खासकर चीन) के सर्वर तक पहुंचता है, तो यह सीधे तौर पर अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है।

ट्रेड वॉर ने लिया डेटा महायुद्ध का रूप
- दरअसल, अमेरिका और चीन के बीच चल रहा तकनीक का ये युद्ध कोई साधारण ट्रेड वॉर नहीं है। यह असल में दोनों देशों के बीच दुनिया की अगली टेक सुपरपावर बनने की होड़ है। आज का युग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग का है। यह पूरी लड़ाई उस बेशकीमती डेटा की है जो हमारे स्मार्ट गैजेट्स 24 घंटे बिना थके कलेक्ट कर रहे हैं।
- तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि एआई और इंटरनेट से जुड़े स्मार्ट डिवाइस जितने सुविधाजनक होते जा रहे हैं, उतनी ही तेजी से वे उपयोगकर्ताओं का डेटा भी कलेक्ट कर रहे हैं। यही कारण है कि दुनिया की बड़ी ताकतें अब केवल हार्डवेयर नहीं, बल्कि डेटा सुरक्षा और डिजिटल संप्रभुता को भी राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा मान रही हैं।
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