इतिहास के पन्नों में नाम दर्ज करवाने के सपने तो हर खिलाड़ी देखता है पर पूरे उन्हीं के होते हैं जिनमें कुछ कर गुजरने का जुनून होता है। वो कड़ी मेहनत से न सिर्फ अपनी मंजिल पा लेते बल्कि अपनी अलग पहचान भी बनाते हैं। आइए मिलते हैं कुछ ऐसे युवा खिलाड़ियों से जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को ही नहीं देश को भी गौरवान्वित किया।
Year Ender 2019: अनजान युवा सितारों ने बिखेरी चमक, दुनिया में मनवाया अपना लोहा
शतरंज के नए बादशाह
तमिलनाडु के डी गुकेश और रमेशबाबू प्रागनानंदा भारतीय शतरंज के नए बादशाह बनकर उभरे हैं। गुकेश साल के शुरुआत में देश के सबसे युवा और दुनिया के दूसरे सबसे युवा ग्रैंड मास्टर बने। उन्होंने 12 साल सात महीने, 17 दिन में यह उपलब्धि हासिल कर प्रागनानंद (12 साल, दस महीने) का पिछले साल जून में बनाया रिकॉर्ड तोड़ा। दुनिया के सबसे युवा ग्रैंडमास्टर का रिकॉर्ड यूक्रेन के सर्गेई कार्जाकिन (12 साल, 7 महीने) के नाम हैं। वहीं 14 साल के प्रागनानंद ने अक्तूबर में विश्व युवा शतरंज चैंपियनशिप में अंडर-18 वर्ग का खिताब जीता।
बोल्ट के वारिस बनने की ओर कोलमैन
अमेरिका के 23 वर्षीय क्रिश्चियन कोलमैन (9.76 सेकंड) ने 100 मीटर का विश्व खिताब जीतकर दिग्गज फर्राटा धावक उसैन बोल्ट का वारिस बनने की ओर कदम बढ़ाए। वह भले ही 0.18 सेकंड से बोल्ट (9.58 सेकंड) के रिकॉर्ड की बराबरी से चूक गए, लेकिन इस सत्र का सबसे तेज और सर्वकालिक छठा समय निकाल वह रफ्तार के नए सौदागर बन गए हैं। यह उनका पहला विश्व खिताब है। उन्होंने चार गुणा 100 मीटर रिले में भी स्वर्ण जीता। अब सभी निगाह टोक्यो ओलंपिक में उनके प्रदर्शन पर रहेगी।
तेजय की जय
जमैका के 23 साल के तेजय गेल ने वह किया जिसे उनसे पहले कोई एथलीट नहीं कर पाया। पहली बार विश्व चैंपियनशिप में भाग लेने वाले तेजय ने लांग जंप में 8.69 मीटर की कूद लगाकर देश को एथलेटिक्स की फील्ड स्पर्धा का पहला स्वर्ण दिलाकर भविष्य की उम्मीद जगाई। उनका यह प्रदर्शन पिछले दस वर्षों का सबसे सर्वश्रेष्ठ जबकि इतिहास का दसवां श्रेष्ठ प्रदर्शन रहा।
वुशू के प्रवीण
हरियाणा के रोहतक के 22 वर्षीय प्रवीण कुमार ने वुशू में विश्व खिताब जीत इस खेल को नई पहचान दिलाई। वह अक्तूबर में फिलीपींस में हुई चैंपियनशिप में 28 साल के इतिहास में विश्व चैंपियन बनने वाले भारत के पहले पुरुष जबकि दूसरे खिलाड़ी बने। उनसे दो साल पहले पूजा कादियान स्वर्ण पदक जीतने वाली देश की पहली खिलाड़ी बनी थीं।