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भारोत्तोलन: मीराबाई का अब नए वर्ग में ओलंपिक पदक जीतने का लक्ष्य, 49 की जगह अब इस भार वर्ग में पेश करेंगी दावा
सार
एशियाई खेलों में रजत पदक जीतने के बाद मीराबाई चानू अब 53 किग्रा भार वर्ग में नई चुनौती के लिए तैयार हैं। 49 किग्रा में अपना सर्वश्रेष्ठ 205 किग्रा वजन उठाने वाली मीरा का लक्ष्य नए वर्ग में 220-225 किग्रा तक पहुंचकर 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक में एक और पदक जीतना है।
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मीराबाई चानू
- फोटो : PTI
विस्तार
वर्षों का इंतजार आखिर पूरा हो गया, एशियाई खेलों का रजत पदक जीतने के बाद मीराबाई चानू के अमर उजाला से पहले शब्द यही थे। अब ऐसे कोई खेल नहीं हैं जिनका पदक मीरा के पास नहीं है, लेकिन एशियाड पदक के बावजूद मीरा अब नई चुनौती से जूझने जा रही हैं।
राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण जीतकर मीरा ने 48 किलो में अपना अंतिम टूर्नामेंट खेला था और अब उन्होंने 49 किलो भार वर्ग में अंतिम बार दावेदारी पेश कर ली है। मीरा कहती हैं, अब आगे उनके लिए चुनौती नया भार वर्ग 53 किलो होगा। सारे पदक पूरे हो गए अब यह नया भार वर्ग उनका नया लक्ष्य है और यही उन्हें अंदर से कुछ कर गुजरने की प्रेरणा प्रदान करेगा। मीरा कहती हैं कि अब लक्ष्य 53 किलो में अपने को स्थापित कर 2028 के लॉस एंजिलिस ओलंपिक में देश के लिए एक और पदक जीतना है।
अब 220 से 225 किलो का लक्ष्य
मीरा कहती हैं कि 49 किलो में उनका सर्वश्रेष्ठ 205 किलो रहा है, लेकिन 53 किलो में कुछ करना है तो 220 से 225 किलो वजन उठाना होगा। उम्र भी 32 हो गई है, लेकिन कोच विजय शर्मा के साथ बैठकर तय करेंगी कि उन्हें अब आगे क्या खाना है, कितना वजन रखना है और मांसपेशियों में कैसे बढ़ोतरी करनी है। विजय भी कहते हैं कि यह चुनौती आसान नहीं होगी। 2028 के ओलंपिक में पदक का लक्ष्य काफी कड़ा होगा। विजय भी मीरा के इस पदक के लिए चिंतित थे। इस कारण उन्होंने मीरा को सावधानी से स्नैच में 83 किलो के जरिये शुरुआत कराई।
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प्रतियोगिता से पहले की रात कुछ नहीं खाया
मीरा बताती हैं कि इस मुकाबले से पहले की रात वह शांत थीं। वजन को लेकर कुछ चिंता थी। मंगलवार को ट्रेनिंग के बाद वजन 49 किलो 800 ग्राम था। शाम को वजन सिर्फ 100 ग्राम कम हुआ तो थोड़ी चिंता हुई, इसलिए रात में खाना नहीं खाया तो सुबह 49 किलो वजन आ गया। अर्जुन अवॉर्ड की टीस देश का सर्वोच्च खेल सम्मान मेजर ध्यानचंद खेल रत्न और पद्मश्री हासिल कर चुकीं मीरा के मन में अर्जुन अवॉर्ड को लेकर अभी भी टीस है।
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राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण जीतकर मीरा ने 48 किलो में अपना अंतिम टूर्नामेंट खेला था और अब उन्होंने 49 किलो भार वर्ग में अंतिम बार दावेदारी पेश कर ली है। मीरा कहती हैं, अब आगे उनके लिए चुनौती नया भार वर्ग 53 किलो होगा। सारे पदक पूरे हो गए अब यह नया भार वर्ग उनका नया लक्ष्य है और यही उन्हें अंदर से कुछ कर गुजरने की प्रेरणा प्रदान करेगा। मीरा कहती हैं कि अब लक्ष्य 53 किलो में अपने को स्थापित कर 2028 के लॉस एंजिलिस ओलंपिक में देश के लिए एक और पदक जीतना है।
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अब 220 से 225 किलो का लक्ष्य
मीरा कहती हैं कि 49 किलो में उनका सर्वश्रेष्ठ 205 किलो रहा है, लेकिन 53 किलो में कुछ करना है तो 220 से 225 किलो वजन उठाना होगा। उम्र भी 32 हो गई है, लेकिन कोच विजय शर्मा के साथ बैठकर तय करेंगी कि उन्हें अब आगे क्या खाना है, कितना वजन रखना है और मांसपेशियों में कैसे बढ़ोतरी करनी है। विजय भी कहते हैं कि यह चुनौती आसान नहीं होगी। 2028 के ओलंपिक में पदक का लक्ष्य काफी कड़ा होगा। विजय भी मीरा के इस पदक के लिए चिंतित थे। इस कारण उन्होंने मीरा को सावधानी से स्नैच में 83 किलो के जरिये शुरुआत कराई।
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प्रतियोगिता से पहले की रात कुछ नहीं खाया
मीरा बताती हैं कि इस मुकाबले से पहले की रात वह शांत थीं। वजन को लेकर कुछ चिंता थी। मंगलवार को ट्रेनिंग के बाद वजन 49 किलो 800 ग्राम था। शाम को वजन सिर्फ 100 ग्राम कम हुआ तो थोड़ी चिंता हुई, इसलिए रात में खाना नहीं खाया तो सुबह 49 किलो वजन आ गया। अर्जुन अवॉर्ड की टीस देश का सर्वोच्च खेल सम्मान मेजर ध्यानचंद खेल रत्न और पद्मश्री हासिल कर चुकीं मीरा के मन में अर्जुन अवॉर्ड को लेकर अभी भी टीस है।