खेल पुरस्कार पाना किसी भी खिलाड़ी का सपना होता है। मेजर ध्यानचंद के जन्मदिन यानि खेल दिवस पर आज राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद राष्ट्रीय खेल पुरस्कार वितरित करेंगे। रियो पैरालंपिक की पदक विजेता पैरा एथलीट दीपा मलिक राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में देश के सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न से सम्मानित होंगी।
58 साल पुराना है खेल पुरस्कारों का इतिहास, जानिए इन अवॉर्ड्स के बारे में सब कुछ
राजीव गांधी खेल रत्न
राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी की स्मृति में दिया जाता है। यह भारत में सर्वोच्च स्थान प्राप्त राष्ट्रीय खेल पुरस्कार है। 'खेल रत्न' का अर्थ है, यह पुरस्कार उन खिलाड़ियों के लिए प्रस्तुत किया जाता है, जिन्होंने खेल के क्षेत्र में असाधारण प्रदर्शन किया है। ग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद को वर्ष 1991-92 में पहली बार खेल रत्न से सम्मानित किया गया था। इस पुरस्कार में एक पदक, एक प्रशस्ति पत्र और साढ़े सात लाख रुपये दिए जाते हैं।
अर्जुन पुरस्कार
भारत में सबसे पुराना राष्ट्रीय खेल पुरस्कार अर्जुन पुरस्कार है। वर्ष 1961 में इसकी शुरुआत हुई थी। खेल में अपनी उत्कृष्टता के लिए खेल हस्तियों को समर्पित यह पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न के बाद दूसरा सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार है। यह पुरस्कार लगातार चार वर्ष तक बेहतरीन प्रदर्शन, लीडरशिप क्वालिटी, खेल भावना और अनुशासन के लिए दिया जाता है। पुरस्कार के रूप में पांच लाख रुपये की राशि, अर्जुन की कांस्य प्रतिमा और एक प्रशस्ति पत्र दिया जाता है। साल 1961 में इस पुरस्कार को कुल छह खिलाड़ियों को दिया गया था। जिसमें सलीम दुरानी इस पुरस्कार से सम्मानित होने वाले पहले क्रिकेटर थे।
द्रोणाचार्य पुरस्कार
वर्ष 1985 में शुरू हुआ द्रोणाचार्य पुरस्कार प्रतिष्ठित प्रशिक्षकों को दिया जाता है, जिनके द्वारा तैयार किए गए खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय खेल स्पर्धाओं में देश का मान बढ़ाते हैं और मेडल जीतकर लाते हैं। इस पुरस्कार से खिलाड़ियों के कोच को सम्मानित किया जाता है। द्रोणाचार्य पुरस्कार के तहत गुरु द्रोणाचार्य की प्रतिमा, प्रमाणपत्र, पारंपरिक पोशाक और पांच लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाता है। द्रोणाचार्य पुरस्कार केवल उन्हीं कोचों को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने लगातार तीन वर्षों तक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर शानदार काम किया हो।
ध्यानचंद अवॉर्ड
यह पुरस्कार खेल-कूद में आजीवन उपलब्धि के लिए वर्ष 2002 में शुरू किया गया सर्वोच्च पुरस्कार है। यह पुरस्कार महान भारतीय हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के नाम पर है। यह पुरस्कार प्राप्त करने वालों को एक प्रतिमा, प्रमाणपत्र, पारंपरिक पोशाक और पांच लाख रुपये नकद दिये जाते हैं। इस पुरस्कार से प्रत्येक वर्ष अधिक से अधिक तीन खिलाड़ियों को सम्मानित किया जाता है। ध्यानचंद पुरस्कार सबसे पहले अपर्णा घोष, अशोक दीवान और शाहराज बिराजजदार को प्रदान किया गया था।