विदुर महाभारत काल के एक महान दार्शनिक और महत्वपूर्ण पात्र थे। वे हस्तिनापुर के प्रधानमंत्री, कौरवों व पांडवों के काका और धृतराष्ट्र एवं पाण्डु के भाई थे। परंतु इनका जन्म एक दासी के गर्भ से हुआ था। विदुर ने अपनी नीतियों के जरिए महाभारत युद्ध को रोकने का भी प्रयास किया था, हालंकि वे इसे रोकने पर नाकाम रहें।
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विदुर कुटी
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चाणक्य नीति के समान विदुर नीति में भी मानव जीवन के कल्याण के लिए बहुत ही बातें बताई गयी हैं। जैसे विदुर नीति में विदुर ने ऐसे चार लोगों का जिक्र किया है, जिन्हें धन, जमीन-जायदाद सौंपने पर वे संपत्ति का सत्यानाश कर देते हैं। ये चार प्रकार के लोग इस प्रकार हैं -
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महात्मा विदुर के मुताबिक जो व्यक्ति आलसी होता है उसे धन-दौलत कभी नहीं सौंपना चाहिए। आलसी व्यक्ति धन दौलत को कभी संभाल नहीं पाता है। वह जमा पूंजी को भी बर्वाद कर देता है और अपने कार्यों को लेकर गंभीर नहीं होता है। वह अपने कार्य को आज की बजाय कल पर टालता है, जो कभी आता ही नहीं है और यदि वह अपना कार्य दूसरों से करवाता है तो इस स्थिति में धन की लागत बढ़ जाती है। ऐसे में धन हानि होना संभव है।
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जिस व्यक्ति की नीयत में खोट हो ऐसे व्यक्ति को धन-दौलत कभी नहीं सौंपना चाहिए। महात्मा विदुर के अनुसार, ऐसा व्यक्ति आपके धन का दुरुपयोग कर सबकुछ बर्वाद कर सकता है। अधर्मी व्यक्ति धन का दुरुपयोग ही करता है, वह पाप के कार्यों में धन खर्च करता है। बेहतर होगा कि आपको यदि धन देना है तो ऐसे किसी व्यक्ति को दें जो सज्जन और भरोसे लायक हो।
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विदुर नीति के अनुसार, दुर्जन व्यक्ति को भी धन नहीं देना चाहिए। ऐसा व्यक्ति आपके धन का नाश तो करेगा ही साथ ही वह आपको भी मुश्किल में डाल सकता है। इस प्रकार के व्यक्ति के ऊपर धन को लेकर कभी भी भरोसा नहीं करना चाहिए अन्यथा वह आपके धन का सत्यानाश कर सकता है।