Geeta Updesh: श्रीमद्भगवद्गीता में कृष्ण जी के उपदेशों का वर्णन है, जिसका अध्ययन करने से कर्तव्य, आत्म-साक्षरता, आत्म-ज्ञान और भक्ति-योग का ज्ञान होता है। कहते हैं कि कृष्ण जी ने गीता का पाठ अर्जुन को तब पढ़ाया था, जब अर्जुन के कदम महाभारत युद्ध के लिए डगमगाने लगे थे। कृष्ण जी के उपदेशों को सुनकर ही अर्जुन लक्ष्य को पूरा करने की ओर अग्रसर हुए थे।
Geeta Updesh: गीता में लिखी ये खास बातें हर क्षेत्र में दिलाती हैं सफलता, समाज में भी बढ़ता है सम्मान
मन पर काबू
भगवान कृष्ण कहते हैं कि अक्सर मनुष्य अपने मन के कारण समस्याओं से घिरा रहता है। यदि मन पर काबू पा लिया जाए, तो अधिकतर समस्याएं समाप्त हो सकती है। उनका मानना है कि मनुष्य की इच्छाएं मन पर ऊपर हावी होती है, जिसे पूरा करने के लिए इंसान किसी भी मार्ग का चयन कर लेता है। ऐसे में मन पर काबू पाना अपने में सफलता है।
अभ्यास करना
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार मनुष्य को हमेशा अभ्यास करते रहना चाहिए। अभ्यास मनुष्य जीवन को आसान बनाता है। कृष्ण जी का मानना है कि अभ्यास से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है, और नए कौशल सीखे जा सकते हैं।
कर्म करना चाहिए
भगवान कृष्ण के अनुसार हर मनुष्य को कर्म करना चाहिए, और कभी भी फल की इच्छा नहीं रखनी चाहिए। उनका मानना है कि जैसा आपका कर्म होगा ईश्वर उसी के अनुरूप ही फल प्रदान करता है। इसलिए कभी भी फल की चिंता नहीं करना चाहिए, क्योंकि कार्य से पहले परिणाम की अपेक्षा करने से मन भ्रमित हो सकता है।
स्वयं का आकलन
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार कोई भी व्यक्ति खुद को खुद से बेहतर न जान सकता है, और न ही समझ सकता है। इसलिए समय समय पर इंसान को स्वयं का आकलन करना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति अपनी खामियों को पहचान कर उस पर कार्य करता है, जो सफलता के मार्ग को आसान बनाता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।