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chanakya niti: समय पड़ने पर ऐसा धन और विद्या नहीं आते हैं काम

Sat, 26 Jun 2021 10:43 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Sat, 26 Jun 2021 10:43 AM IST
सार

आचार्य चाणक्य अर्थशास्त्री, श्रेष्ठ विद्वान और योग्य शिक्षक थे, इसलिए वे विद्या और धन के महत्व को बखूबी समझते थे। जानते हैं आचार्य चाणक्य ने धन और विद्या के विषय में कौन सी परिस्थितियों का जिक्र किया है जब ये दोनों ही चीजें व्यक्ति के किसी काम की नहीं रहती हैं।

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Chanakya niti shiksha According to neeti shastra such money and knowledge is of no use
आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media

आचार्य चाणक्य कुशाग्र बुद्धि और आसाधारण प्रतिभा के धनी थे। इन्हें विभिन्न विषयों का गहन ज्ञान था, इसलिए ये कौटिल्य के नाम से भी विख्यात थे। चाणक्य एक श्रेष्ठ विद्वान, दूर्दर्शी होने के साथ एक योग्य शिक्षक भी थे। आचार्य चाणक्य ने विश्वप्रसिद्ध तक्षशिला विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण की और यहीं पर आचार्य पद पर रहते हुए विद्यार्थियों को शिक्षित भी किया। इसलिए वे अपने जीवन में ज्ञान का महत्व बहुत अच्छे से समझते थे। आचार्य चाणक्य एक महान अर्थशास्त्री थे। इसके साथ ही उन्होंने अपने जीवन में अच्छी और बुरी दोनों तरह की परिस्थितियों का सामना किया था, इसलिए वे धन के महत्व को भी बाखूबी समझते थे। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जहां बुरे समय से निकलने के लिए धन सबसे सच्चा मित्र होता है तो वहीं विद्या सबसे बड़ा धन होती है लेकिन आचार्य चाणक्य ने ऐसी परिस्थितियों के बारे में भी जिक्र किया है जब विद्या और धन भी व्यक्ति के किसी काम के नहीं रह जाते हैं। तो आइए जानते हैं कि आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में धन और विद्या के विषय में क्या कहा है।

Chanakya niti shiksha According to neeti shastra such money and knowledge is of no use
आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
पुस्तकेषु च या विद्या परहस्तेषु च यद्धनम्

उत्पन्नेषु च कार्येषु न सा विद्या न तद्धनम्

आचार्य चाणक्य इस श्लोक के माध्यम से कहते हैं कि जो विद्या पुस्तक में रहती है वह व्यक्ति के किसी काम की नहीं रहती है। यहां पर कहने का तात्पर्य यह है कि जो ज्ञान केवल किताबों तक सीमित रहता है और व्यक्ति वक्त आने पर उसका प्रयोग नहीं कर पाता है ऐसे ज्ञान का कोई औचित्य नहीं होता है। यहां पर कहा गया है कि व्यक्ति को किताबी ज्ञान के साथ व्यवहारिक ज्ञान की भी समझ होना अति आवश्यक होता है। जो लोग केवल किताबों को रटते हैं और व्यवहारिकता की समझ नहीं होती है, वह ज्ञान किसी काम का नहीं होता है। इसी तरह आचार्य चाणक्य यह भी कहते हैं कि व्यक्ति को गुरु से ज्ञान लेते समय अपनी जिज्ञासा को पूरी तरह से शांत करना चाहिए। आधे-अधूरे ज्ञान का कोई फायदा नहीं रहता है। जब मनुष्य को उस ज्ञान का प्रयोग करने की बारी आती हैं तो पूरी तरह से ज्ञान न होने के कारण वह पीछे रह जाता है।

Chanakya niti shiksha According to neeti shastra such money and knowledge is of no use
आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
दूसरे के पास पड़ा हुआ धन

आचार्य चाणक्य इस श्लोक में कहते हैं कि जो धन दूसरों के पास पड़ा है वह किसी काम का नहीं है। यहां पर कहने का तात्पर्य यह है कि धन का संचय सदैव अपने पास करके रखना चाहिए ताकि समय पर उसको उपयोग में लाया जा सके। कुछ लोग अपना धन दूसरों को रखने के लिए दे देते है लेकिन ऐसा धन समय पड़ने पर किसी काम का नहीं रहता है। धन के मामले में किसी भी व्यक्ति पर विश्वास नहीं किया जा सकता है।

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Chanakya niti shiksha According to neeti shastra such money and knowledge is of no use
आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
गलत कार्यों से कमाया गया धन

आचार्य चाणक्य ने धन के विषय में ये भी कहा है कि व्यक्ति को सदैव मेहनत और ईमानदारी से ही धन कमाना चाहिए। गलत कार्यों या किसी के साथ छल-कपट करके कमाया गया धन बहुत जल्दी नष्ट हो जाता है और समय पड़ने पर व्यक्ति के किसी काम का नहीं रहता है।

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