आचार्य चाणक्य कुशाग्र बुद्धि और आसाधारण प्रतिभा के धनी थे। इन्हें विभिन्न विषयों का गहन ज्ञान था, इसलिए ये कौटिल्य के नाम से भी विख्यात थे। चाणक्य एक श्रेष्ठ विद्वान, दूर्दर्शी होने के साथ एक योग्य शिक्षक भी थे। आचार्य चाणक्य ने विश्वप्रसिद्ध तक्षशिला विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण की और यहीं पर आचार्य पद पर रहते हुए विद्यार्थियों को शिक्षित भी किया। इसलिए वे अपने जीवन में ज्ञान का महत्व बहुत अच्छे से समझते थे। आचार्य चाणक्य एक महान अर्थशास्त्री थे। इसके साथ ही उन्होंने अपने जीवन में अच्छी और बुरी दोनों तरह की परिस्थितियों का सामना किया था, इसलिए वे धन के महत्व को भी बाखूबी समझते थे। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जहां बुरे समय से निकलने के लिए धन सबसे सच्चा मित्र होता है तो वहीं विद्या सबसे बड़ा धन होती है लेकिन आचार्य चाणक्य ने ऐसी परिस्थितियों के बारे में भी जिक्र किया है जब विद्या और धन भी व्यक्ति के किसी काम के नहीं रह जाते हैं। तो आइए जानते हैं कि आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में धन और विद्या के विषय में क्या कहा है।
chanakya niti: समय पड़ने पर ऐसा धन और विद्या नहीं आते हैं काम
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Shashi Shashi
Updated Sat, 26 Jun 2021 10:43 AM IST
सार
आचार्य चाणक्य अर्थशास्त्री, श्रेष्ठ विद्वान और योग्य शिक्षक थे, इसलिए वे विद्या और धन के महत्व को बखूबी समझते थे। जानते हैं आचार्य चाणक्य ने धन और विद्या के विषय में कौन सी परिस्थितियों का जिक्र किया है जब ये दोनों ही चीजें व्यक्ति के किसी काम की नहीं रहती हैं।
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