Vidur Niti: कहा जाता है कि जीवन को खूबसूरत बनाने के लिए मन में हमेशा स्वीकार का भाव होना चाहिए। यदि व्यक्ति के भीतर परिस्थिति को स्वीकार करने की क्षमता होती है, तो वह हर समस्या का समाधान कर सकता है। कुछ लोग अपने पास मौजूद पद, धन व महंगी वस्तुओं के होने पर भी खुश नहीं होते हैं। वह हमेशा इसे बढ़ाने के प्रयास करते रहते हैं। कई बार दूसरों से ईर्ष्या के कारण व्यक्ति फिजूल खर्च करने लगता है, जो उसके भविष्य को भी प्रभावित करता है।
महात्मा विदुर के अनुसार इंसान में मौजूद गुण उसे दूसरों से अलग बनाते हैं। व्यक्ति की अच्छी आदतें उसे समाज में मान सम्मान दिलाती हैं। ऐसे लोगों पर ईश्वर भी मेहरबान रहता है। लेकिन कुछ आदतें उसे आगे बढ़ने से रोकती हैं। साथ ही इसके चलते वह हमेशा अपना नुकसान कराता है। विदुर के अनुसार व्यक्ति को किसी भी तरह की ईर्ष्या नहीं रखनी चाहिए। यदि वह मन में जलन की भावना रखता है, तो वह सारी धन दौलत धीरे-धीरे गंवा देता है। ऐसे लोगों को समाज में भी सम्मान प्राप्त नहीं होता है। इन्हें त्याग देने में ही भलाई हैं। आइए इन आदतों के बारे में विस्तार से जान लेते हैं।
2 of 5
Vidur Niti for unhappy people
- फोटो : istock
दूसरों से घृणा
दूसरों से घृणा करने वाला व्यक्ति हमेशा पीछे रह जाता है। साथ ही दुख ऐसे लोगों का कभी पीछा नहीं छोड़ता। आचार्य विदुर के अनुसार व्यक्ति को कभी भी घृणा का भाव नहीं रखना चाहिए। यह आपकी परेशानियों का कारण बनती है और व्यक्ति मुसीबत में घिरा रहता है।
3 of 5
Vidur Niti for unhappy people
- फोटो : istock
बात बात पर क्रोध
क्रोध करने वाले व्यक्ति हमेशा अपना नुकसान स्वयं करता है। वह इसके चलते अपने लाभ को हानि में बदल लेता है। ऐसे लोग अपने गुस्से के आगे किसी को कुछ नहीं समझते है। इस आदत के कारण व्यक्ति आर्थिक तंगी का सामना भी करता है। विदुर के अनुसार क्रोध करने वाला व्यक्ति हमेशा पछताता है, वह अपने सम्मान में कमी का कारण खुद बनता है।
4 of 5
Vidur Niti for unhappy people
- फोटो : istock
कार्यों से असंतुष्ट रहना
अपने आप को संतुष्ट करना अच्छी बात है परंतु इसका आदि होना व्यक्ति के लिए नुकसानदायक होता है। विदुर के अनुसार कुछ लोग अपने को संतुष्ट करने के लिए दूसरों को हानि पहुंचाते हैं। ऐसे लोग केवल अपने लाभ के चलते लोगों से जुड़ते है।
5 of 5
Vidur Niti for unhappy people
- फोटो : istock
भाग्य के भरोसे
हमेशा भाग्य के भरोसे बैठने वाले व्यक्ति को निराशा ही मिलती है। साथ ही दूसरों पर निर्भर रहने वाले लोग भी अपने दुखों का कारण खुद बनते है। विदुर नीति के अनुसार व्यक्ति को कभी भी दूसरों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। इससे हम हंसी का पात्र बनते हैं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।