फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Yogini ekadashi 2021: इस व्रत के प्रभाव से कुष्ठ रोग से मुक्ति मिलने की है मान्यता, जानें इससे जुड़ी कथा

Wed, 30 Jun 2021 02:15 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Wed, 30 Jun 2021 02:15 PM IST
सार

इस बार आषाढ़ मास का एकादशी का व्रत 05 जुलाई 2021 दिन सोमवार को किया जाएगा। इस एकादशी का महातम्य सुनाते हुए भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि इसके प्रभाव से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस व्रत के प्रभाव से कुष्ठ जैसे भयानक रोग से भी मुक्ति प्राप्त हो जाती है। तो आइए जानते हैं योगिनी एकादशी की कथा।

विज्ञापन
Yogini ekadashi 2021 date importance and know the story katha of yogini ekadashi
योगिनी एकादशी 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)

प्रत्येक माह में दोनों पक्षों कृष्ण पक्ष व शुक्ल पक्ष में एकादशी तिथि का व्रत किया जाता है। यह व्रत भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित होता है। मान्यता है कि जो मनुष्य प्रत्येक एकादशी का व्रत करता है उसके समस्त पापों का नाश हो जाता है। मनुष्य को जीवन सभी सुखों की प्राप्ति होती है और इस लोक के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। एकादशी के व्रत को सभी व्रतों में श्रेष्ठ बताया गया है। आषाढ़ मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को योगिनी एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी दो महत्वपूर्ण एकादशियों निर्जला और देवशयनी के मध्य पड़ती है। इस बार आषाढ़ मास की एकादशी तिथि 05 जुलाई 2021 दिन सोमवार को पड़ रही है। प्रत्येक एकादशी कि तरह योगिनी एकादशी का भी अपना एक अलग महातम्य है। योगिनी एकादशी के विषय में पौराणिक धार्मिक कथा के अनुसार यह इस एकादशी का व्रत करने से कुष्ठ रोग से भी मुक्ति प्राप्त हो जाती है। तो आइए जानते हैं योगिनी एकादशी व्रत की कथा।


 
Yogini ekadashi 2021 date importance and know the story katha of yogini ekadashi
योगिनी एकादशी 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)

धर्मराज युधिष्ठिर कहते हैं कि भगवन, मैंने ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी के व्रत का महात्म्य सुना। अब कृपया आषाढ़ कृष्ण एकादशी की कथा सुनाइए। इसका नाम क्या है? महात्म्य क्या है? तब भगवान श्रीकृष्ण कहने लगे कि हे राजन! आषाढ़ कृष्ण एकादशी को योगिनी एकादशी कहा जाता है। इसके व्रत से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। यह एकादशी तीनों लोको में प्रसिद्ध है और यह इस लोक में भोग और परलोक में भी मुक्ति देने वाली है। यह तीनों लोकों में प्रसिद्ध है। मैं तुमसे पुराणों में वर्णन की हुई कथा कहता हूं तो इसे ध्यानपूर्वक सुनो।


तब भगवान श्री कृष्ण योगिनी एकादशी की कथा सुनाते हुए कहते हैं कि स्वर्गधाम की अलकापुरी नामक नगरी में कुबेर नाम का एक राजा रहता था। वह शिव भक्त था और प्रतिदिन भगवान शिव की पूजा-आराधना किया करता था। हेम नाम का एक माली प्रतिदिन पूजन के लिए उसके यहां फूल लेकर आया करता था। हेम की विशालाक्षी नाम की सुंदर पत्नी थी। एक दिन वह पूजा के लिए मानसरोवर से पुष्प लेने गया। वह पुष्प ले आया परंतु कामासक्त होने के कारण वह अपनी स्त्री से हास्य-विनोद तथा रमण करने लगा।


 
Yogini ekadashi 2021 date importance and know the story katha of yogini ekadashi
योगिनी एकादशी 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)

इधर राजा फूलों के लिए दोपहर तक उसकी राह देखता रहा। अंत में राजा कुबेर ने सेवकों को आज्ञा दी कि तुम लोग जाकर माली के न आने का कारण पता करो, क्योंकि वह अभी तक पुष्प लेकर नहीं आया। सेवकों ने आकर राजा को बताया कि महाराज वह पापी अतिकामी है, अपनी स्त्री के साथ हास्य-विनोद और रमण कर रहा होगा। यह सुनकर कुबेर ने क्रोधित होकर उसे बुलाया। हेम माली भय से कांपता हुआ राजा के समक्ष उपस्थित हुआ। राजा कुबेर ने क्रोध में आकर कहा- ‘अरे पापी! नीच! कामी! तूने मेरे परम पूजनीय ईश्वरों के ईश्वर श्री शिवजी महाराज का अनादर किया है, इसलिए मैं तुझे श्राप देता हू कि तू स्त्री का वियोग सहेगा और मृत्युलोक में जाकर कोढ़ी होगा।

कुबेर के श्राप से हेम माली का स्वर्ग से पतन हो गया और वह उसी क्षण पृथ्वी पर गिर गया। भूतल पर आते ही उसके शरीर में श्वेत कोढ़ हो गया। उसकी स्त्री भी उसी समय अंतर्ध्यान हो गई। मृत्युलोक में आकर माली ने अत्यंत दु:ख भोगने लगा। वह भयानक जंगल में जाकर बिना अन्न और जल के भटकने लगा। उसको रात्रि में भी निद्रा नहीं आती थी, परंतु शिवजी की पूजा के प्रभाव से उसको पिछले जन्म की स्मृति का ज्ञान अवश्य रहा। इसी तरह से भटकते-भटकते एक दिन वह ऋषि मार्कण्डेय के आश्रम में पहुंचा गया। ये ब्रह्मा से भी अधिक वृद्ध थे और जिनका आश्रम ब्रह्मा की सभा के समान लगता था। वहां जाकर हेम माली उनके पैरों में पड़ गया।


 
विज्ञापन
विज्ञापन
Yogini ekadashi 2021 date importance and know the story katha of yogini ekadashi
योगिनी एकादशी 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : lord vishnu (demo pic)

उसे देखकर मार्कण्डेय ऋषि ने कहा कि तुमने ऐसा कौन-सा पाप किया है, जिसके प्रभाव से तुम्हारी यह स्थिति हो गई। तब हेम माली ने सारा वृत्तांत कह सुनाया। यह सुनकर ऋषि बोले- निश्चित ही तूने मेरे सम्मुख सत्य वचन कहे हैं, इसलिए तेरे उद्धार के लिए मैं एक व्रत बताता हूं। हेम माली को श्राप मुक्ति का उपाय बताते हुअ ऋषि मार्कण्डेय कहते हैं कि यदि तू आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी नामक एकादशी का व्रत विधिपूर्वक करेगा तो तेरे सारे पाप नष्ट हो जाएंगे।

उनके ऐसे वचन सुनकर हेम माली अत्यंत प्रसन्न हुआ। उसने मुनि को साष्टांग प्रणाम किया। इसके बाद हेम माली ने मुनि के कथनानुसार विधिपूर्वक योगिनी एकादशी का व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से उसके सभी पाप नष्ट हो गए और वह पुनः अपने स्वरूप को प्राप्त हुआ व  फिर से वह अपनी स्त्री के साथ सुखपूर्वक रहने लगा। भगवान कृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर से कहा कि हे राजन! यह योगिनी एकादशी का व्रत 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समाप फल प्रदान करता है। इसके व्रत के पुण्य प्रभाव समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और अंत में मनुष्य स्वर्ग को प्राप्त करता है।




 
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed