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Sawan Pradosh Vrat 2021: सावन का पहला प्रदोष व्रत आज, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Thu, 05 Aug 2021 06:14 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Thu, 05 Aug 2021 06:14 AM IST
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श्रावण गुरु प्रदोष 2021 - फोटो : अमर उजाला

श्रावण मास का पहला प्रदोष व्रत 5 अगस्त 2021 को है। गुरुवार के दिन पड़ने के कारण इस व्रत को गुरु प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाएगा। हिन्दू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष व्रत रखने का विधान है। ऐसे में हर महीने प्रदोष व्रत दो बार रखा जाता है पहला कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को तो दूसरा शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन। श्रावण का महीना भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती को प्रिय है और प्रदोष व्रत भी इन्हीं के लिए रखा जाता है। इसी कारण श्रावण मास में पड़ने वाले प्रदोष व्रत का भी महत्व बढ़ जाता है। मान्यता है कि जो भक्त प्रदोष व्रत को सच्चे मन से रखता है उस जातक की कुंडली से चंद्र दोष दूर होता है और मां गौरा और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। आइए जानते हैं सावन के पहले प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त, व्रत विधि और महत्व क्या है?

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श्रावण गुरु प्रदोष 2021 - फोटो : अमर उजाला

श्रावण प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ - 5 अगस्त 2021, को शाम 05 बजकर 09 मिनट
त्रयोदशी तिथि समाप्त - 6 अगस्त 2021, को शाम 06 बजकर 28 मिनट तक

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श्रावण गुरु प्रदोष 2021 - फोटो : Social media
सावन का पहला प्रदोष व्रत है खास

श्रावण मास का पहला प्रदोष व्रत खास इसलिए है क्योंकि यह व्रत गुरुवार के दिन पड़ रहा है। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना की जाती है। गुरु प्रदोष व्रत के दिन श्रीराम रक्षा स्तोत्र का जाप अत्यंत लाभकारी माना जाता है। दरअसल भगवान शिव जी स्वयं भगवान श्रीराम को अपना आराध्य मानते हैं। इसलिए गुरु प्रदोष के दिन शिव-पार्वती की पूजा के साथ साथ भगवान विष्णु जी की आराधना करने से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि और सौभाग्य का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

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श्रावण गुरु प्रदोष 2021 - फोटो : pinterest
प्रदोष व्रत पूजा विधि

प्रदोष व्रत करने के लिए त्रयोदशी के दिन जल्दी सुबह उठकर स्नान करें। मन में प्रदोष व्रत को रखने का संकल्प लें। इसके बाद पूजा स्थल पर गंगा जल छिड़कें और शिव-पार्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। भगवान शिव को जल चढ़ाकर भगवान शिव का मंत्र जपें। पूरे दिन निराहार रहें। शाम को पुनः भगवान शिव की आराधना करें। उन्हें शमी, बेल पत्र, कनेर, धतूरा, चावल, फूल, धूप, दीप, फल, पान, सुपारी आदि चढ़ाएं। अंत में शिव आरती के बाद प्रसाद बांटें और भोजन ग्रहण करें। इस दिन शिव चालीसा और शिवाष्टक का पाठ करना लाभकारी होता है। 

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श्रावण गुरु प्रदोष 2021 - फोटो : getty images

भगवान शिव के मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥ 
ॐ नमः शिवाय। ॐ आशुतोषाय नमः।

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