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श्राद्ध पक्ष : क्या दामाद कर सकता है ससुर का श्राद्ध? जानिए गरुड़ पुराण के नियम

Thu, 01 Oct 2026 12:30 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Thu, 01 Oct 2026 12:30 AM IST
सार

पितृ पक्ष 2026 में श्राद्ध और पिंडदान को लेकर कई सवाल मन में आते हैं। खासकर जब परिवार में बेटा न हो, तो श्राद्ध की जिम्मेदारी कौन निभा सकता है? क्या दामाद भी यह धार्मिक कर्म कर सकता है? जानिए गरुड़ पुराण और धार्मिक मान्यताओं में बताए गए नियम।

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Shradh 2026 Can a Son-in-Law Perform the Shradh Rites? Know What Garuda Purana Says
श्राद्ध पक्ष नियम - फोटो : amar ujala

पितृ पक्ष को हिंदू धर्म में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और उनके निमित्त श्राद्ध, तर्पण व पिंडदान करने का महत्वपूर्ण समय माना जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में पितरों का स्मरण और उनके लिए किए गए धार्मिक कर्म परिवार के लिए शुभ माने जाते हैं। वर्ष 2026 में पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर से हुई है और इसका समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। पितृ पक्ष के दौरान लोग अपने दिवंगत माता-पिता, दादा-दादी और अन्य पूर्वजों के लिए श्राद्ध कर्म करते हैं। ऐसे में एक सवाल अक्सर सामने आता है कि अगर परिवार में पुत्र न हो, तो यह जिम्मेदारी कौन निभा सकता है? क्या बेटी का पति यानी दामाद सास-ससुर का श्राद्ध कर सकता है? आइए जानते हैं इस विषय में प्रचलित धार्मिक मान्यताएं।

Shradh 2026 Can a Son-in-Law Perform the Shradh Rites? Know What Garuda Purana Says
पुत्र के उपलब्ध न होने पर पोते यानी पुत्र के पुत्र को श्राद्ध कर्म करने का अधिकारी माना जाता है। - फोटो : Amar Ujala

पुत्र न होने पर कौन कर सकता है श्राद्ध?
धार्मिक परंपराओं में श्राद्ध कर्म के लिए पुत्र को प्रमुख अधिकारी माना गया है। सामान्य रूप से दिवंगत माता-पिता के श्राद्ध की जिम्मेदारी पुत्र द्वारा निभाने की परंपरा रही है। एक से अधिक पुत्र होने की स्थिति में ज्येष्ठ पुत्र के श्राद्ध करने की बात भी कई धार्मिक परंपराओं में कही गई है। पुत्र के उपलब्ध न होने पर पोते यानी पुत्र के पुत्र को श्राद्ध कर्म करने का अधिकारी माना जाता है। इसके बाद कुछ परंपराओं में नाती यानी बेटी के पुत्र द्वारा भी नाना-नानी के श्राद्ध की व्यवस्था बताई गई है। हालांकि, अलग-अलग धार्मिक परंपराओं और परिवारों में इन नियमों की व्याख्या अलग हो सकती है।

Shradh 2026 Can a Son-in-Law Perform the Shradh Rites? Know What Garuda Purana Says
धार्मिक परंपराओं में दामाद को सास-ससुर के श्राद्ध का मुख्य अधिकारी नहीं माना जाता। - फोटो : AI

क्या दामाद कर सकता है सास-ससुर का श्राद्ध?
प्रचलित गरुड़ पुराण संबंधी व्याख्याओं और धार्मिक परंपराओं में दामाद को सास-ससुर के श्राद्ध का मुख्य अधिकारी नहीं माना जाता। यानी केवल बेटी का पति होने के आधार पर उसे सास-ससुर के श्राद्ध का वही अधिकार प्राप्त नहीं होता, जो पुत्र या कुछ अन्य निर्धारित उत्तराधिकारियों को धार्मिक परंपरा में दिया गया है। हालांकि, इस विषय में अलग-अलग क्षेत्रों, संप्रदायों और परिवारों में रीति-रिवाज अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी विशेष परिस्थिति में स्थानीय पुरोहित या परिवार की परंपरा के अनुसार निर्णय लिया जाता है।

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दामाद को विवाह के बाद मायके के गोत्र का सदस्य नहीं माना जाता। - फोटो : AI

दामाद को लेकर क्यों अलग मानी जाती है धार्मिक परंपरा?
इस विषय को समझने के लिए हिंदू विवाह परंपरा में गोत्र और पारिवारिक संबंधों की अवधारणा को भी देखा जाता है। पारंपरिक हिंदू विवाह व्यवस्था में विवाह के बाद महिला का संबंध पति के परिवार और गोत्र से जोड़ा जाता है। इसी वजह से बेटी के पति यानी दामाद को विवाह के बाद मायके के गोत्र का सदस्य नहीं माना जाता। धार्मिक कर्मकांडों में गोत्र और वंश से जुड़े नियमों का महत्व होने के कारण कई परंपराओं में दामाद को सास-ससुर के अंतिम संस्कार या श्राद्ध कर्म का मुख्य कर्ता नहीं माना गया है।

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सामाजिक सम्मान और धार्मिक अधिकार अलग विषय - फोटो : amar ujala

सामाजिक सम्मान और धार्मिक अधिकार अलग विषय
दामाद को परिवार में बेटे के समान सम्मान दिया जा सकता है, लेकिन सामाजिक रिश्ते और धार्मिक कर्मकांड का अधिकार एक ही बात नहीं हैं। किसी परिवार में दामाद को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाना अलग विषय है, जबकि श्राद्ध का कर्ता कौन होगा, यह पारंपरिक धार्मिक नियमों और परिवार की मान्यता पर निर्भर करता है। इसी कारण केवल सामाजिक रूप से बेटे जैसा दर्जा मिलने से दामाद को स्वतः श्राद्ध का धार्मिक अधिकारी नहीं माना जाता।

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