Shardiya Navratri 2020: नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की आराधना की जाती है। मां दुर्गा की आराधना में पान का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कहते हैं मां दुर्गा ने आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन महिषासुर के वध से पहले शहद भरे पान के पत्ते का सेवन किया था। इसलिए माता रानी की पूजा में पान चढ़ाया जाता है। पान माता रानी को अत्यंत ही प्रिय है।
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पान के बिना कोई भी अनुष्ठान अधूरा माना जाता है।
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हिन्दू धर्म में किसी भी खास आयोजन में पान के पत्ते का इस्तेमाल करना महत्वपूर्ण होता है। भगवान की पूजा हो या फिर कोई त्योहार पूजा सामग्री में पान के पत्ते का प्रयोग जरूरी माना जाता है। पान के बिना कोई भी अनुष्ठान अधूरा माना जाता है।
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पूजा में पान का पत्ता एक अहम सामग्री होती है।
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पूजा में पान का पत्ता एक अहम सामग्री होती है। स्कंद पुराण के अनुसार पान के पत्ते का प्रयोग देवताओं के द्वारा समुद्र मंथन के समय इसका प्रयोग किया गया था। इसलिए इसका पूजा में महत्व होता है।
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पान के पत्ते में वास करते हैं कई देवी-देवता
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पान के पत्ते के ऊपरी भाग पर इन्द्र और शुक्र देव विराजमान होते हैं। बीच वाले हिस्से में सरस्वती मां का वास होता है और मां महालक्ष्मी जी इस पत्ते के बिलकुल नीचे वाले हिस्से पर बैठी हैं, वहीं विश्व के पालनहार भगवान शिव पान के पत्ते के भीतर वास करते हैं। भगवान शिव एवं कामदेव जी का स्थान इस पत्ते के बाहरी हिस्से पर होते है।
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पूजा में पान के पत्तों का इस्तेमाल करना शुभ होता है।
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शास्त्रों के अनुसार पान के पत्तों में देवी-देवताओं का वास होता है इसलिए भी पूजा में इसका इस्तेमाल करना शुभ होता है साथ ही इससे नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है।