{"_id":"5f7ee2bfb7103174ac400c2b","slug":"sharadiya-navratri-2020-9-days-of-navratri-devi-puja-know-about-the-nine-swaroop-of-devi-durga","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Navratri 2020: नवरात्रि के नौ दिन और माता के नौ स्वरूपों की उपासना और महत्व","category":{"title":"Religion","title_hn":"धर्म","slug":"religion"}}
Navratri 2020: नवरात्रि के नौ दिन और माता के नौ स्वरूपों की उपासना और महत्व
नवरात्रि में नौ दिनों तक मां के नौ स्वरुपों मां शैलपुत्री, मां ब्रह्मचारिणी, मां चंद्रघंटा, मां कूष्मांडा, मां स्कंदमाता, मां कात्यायनी, मां कालरात्रि, मां महगौरी, मां सिद्धिदात्री की पूजा क्रमानुसार की जाती है। मां के ये स्परुप अत्यंत कल्याणकारी और हर विपदा को हरने वाले हैं। मां के इन नौं स्वरुपों का अलग-अलग महत्व है। नवरात्रि के नौ दिनों तक व्रत और पूजन करने वाले साधक का मन हर दिन अलग चक्र में स्थापित होता है। जानते हैं कि किस दिन साधक का मन किस चक्र में स्थापित रहता है।
2 of 10
navratri 2020 मां शैलपुत्री
नवरात्रि के प्रथम दिन घटस्थापना के साथ मां के प्रथम स्परुप शैलपुत्री की पूजा अर्चना की जाती है। राजा हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। ये वृषभ पर विराजती हैं इनके दाएं हाथ में त्रिशूल तो बाएं हाथ में कमल रहता है इनका स्वरुप बहुत मनमोहक लगता है। नवरात्रि के प्रथम दिन साधक का मन मूलाधार चक्र में स्थापित होता है।
3 of 10
navratri 2020 मां ब्रह्मचारिणी
नवरात्रि में दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। इनके नाम का अर्थ तप का आचरण करने वाली है। इनका स्वरुप तेजमय और अत्यंत भव्य है। ये अपने दाएं हाथ में कमंडल दो बाएं हाथ में माला धारण करती हैं। इस दिन साधक का मन स्वाधिष्ठान चक्र में रहता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
4 of 10
navratri puja 2020 मां चंद्रघटा
मां चंद्रघंटा का पूजन नवरात्रि को तीसरे दिन किया जाता है मां अपने माथे पर अर्द्ध चंद्र धारण करती हैं। जिसके कारण इनका नाम चंद्रघंटा पड़ा। इनके घंटे की ध्वनि से सभी बुरी शक्तियां डर कर दूर भागती हैं। ये सिंह पर विराजती हैं, इनका शरीर स्वर्ण के समान चमकीला है। इनकी पूजा वाले दिन साधक का मन मणिपुर चक्र में स्थापित होता है।
विज्ञापन
5 of 10
navratri 2020 कूष्मांडा माता
मां के चौथे स्वरुप को कूष्मांडा कहा जाता है। कहते है जब सृष्टि में चारों ओर अंधकार था, तब इन्होंने ही अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। जिसके कारण इनका नाम कूष्मांडा पड़ा। मां कूष्मांडा के पूजन के दिन साधक का मन अनाहत चक्र में स्थापित होता है।
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।