एक माह में दो पक्ष होते हैं कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष। दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है। इस तरह से हर माह में दो प्रदोष व्रत आते हैं। प्रदोष व्रत जिस वार को पड़ता है, उसी के अनुसार उसका नाम होता है। इस बार प्रदोष तिथि शनिवार के दिन की हैं, इसलिए यह शनि प्रदोष व्रत कहलाएगा। इस पक्ष का प्रदोष व्रत 12 दिसंबर 2020 यानी कल पड़ रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रदोष व्रत करने से शिवजी प्रसन्न होते हैं और उनकी असीम कृपा प्राप्त होती है। इस बार प्रदोष व्रत शनिवार को पड़ने के कारण शनि की पीड़ा से मुक्ति पाने के लिए बहुत लाभकारी रहेगा। तो चलिए जानते हैं शनिप्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि...
shani pradosh vrat: 12 दिसंबर को है शनि प्रदोष व्रत, जानिए इसका महत्व और पूजा विधि
- शनि प्रदोष व्रत के दिन प्रातःकाल उपवास जल्दी उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त होकर स्नान करके स्वच्छ धुले हुए वस्त्र धारण करें।
- उसके बाद शिव मंदिर में जाकर शिव जी का पूजन करें और पूरे दिन निराहार व्रत करें।
- शनिवार को पर्दोष तिथि पड़ने का कारण इस बार शनिदेव की कृपा भी प्राप्त होगी। इसलिए शनिदेव का भी पूजन करें।
- पूरे दिन मन ही मन शिव जी के पंचाक्षरी मंत्र का जाप करें।
शनि प्रदोष व्रत की पूजा विधि
'ॐ ह्रीं क्लीं नम: शिवाय स्वाहा'।
प्रदोष व्रत के दिन शिव जी की कृपा पाने के लिए जपे ये मंत्र
शिवजी का मूल पंचाक्षरी मंत्र:- ''ॐ नम: शिवाय''
रूद्र गायत्री मंत्र:- ''ॐ तत्पुरुषाय विद्महे, महादेवाय धीमहि, तन्नो रुद्र: प्रचोदयात्''
महामृत्युंजय मंत्र:- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
पूजा का समय शाम को 5 बजकर 25 मिनट से लेकर रात 08 बजकर 09 मिनट तक रहेगा। इस तरह से पूजा करने का समय 2 घंटे 44 मिनट का होगा।