Sawan Somwar 2025: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति का विशेष समय माना गया है। इस मास में की गई उपासना शीघ्र फलदायी होती है। शिव-पार्वती की कृपा प्राप्त करने, योग्य जीवनसाथी की कामना, वैवाहिक सुख, मानसिक शांति, रोगों से मुक्ति और आत्मिक उन्नति जैसे उद्देश्यों से श्रद्धालु इस माह में सोमवार का व्रत करते हैं। जो व्यक्ति पहली बार यह व्रत रख रहे हैं, उनके लिए कुछ धार्मिक नियमों और सावधानियों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि व्रत का पूर्ण लाभ प्राप्त हो सके।
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Sawan Somwar 2025: पहली बार रखने जा रहे हैं सावन सोमवार व्रत? इन बातों का रखें ध्यान
Sun, 13 Jul 2025 10:08 PM IST
ज्योति मेहरा
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति मेहरा
Updated Sun, 13 Jul 2025 10:08 PM IST
सार
सावन सोमवार का व्रत पहली बार रखने वालों के लिए कुछ धार्मिक नियमों और सावधानियों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि व्रत का पूर्ण लाभ प्राप्त हो सके। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
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सावन सोमवार व्रत के नियम
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सावन सोमवार व्रत के नियम
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सावन सोमवार व्रत के नियम
- व्रती को ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करना चाहिए।
- शुद्ध होकर घर के मंदिर या शिवालय में बैठकर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र के उच्चारण के साथ व्रत का संकल्प लें।
- यह भी तय करें कि आप पूरे सावन के सोमवार व्रत करेंगे या किसी विशेष सोमवार को ही व्रत रखेंगे।
- पूजन के दौरान शिवलिंग पर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शुद्ध जल) से अभिषेक करें।
- इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, शमीपत्र, सफेद फूल, और भस्म आदि अर्पित करें।
सावन सोमवार व्रत के नियम
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- शिवजी की स्तुति हेतु "महामृत्युंजय मंत्र", "ॐ नमः शिवाय", या "शिव चालीसा" का पाठ करें।
- रुद्राभिषेक और रुद्राष्टक पाठ इस दिन विशेष पुण्यदायी माने जाते हैं।
- यदि किसी कन्या के विवाह में विलंब हो रहा हो तो शिव-पार्वती को गुलाब के फूल अर्पित करें और "ॐ शं शंकराय नमः" मंत्र का जाप करें। सोमवार को शिव मंदिर में जल चढ़ाना, काले तिल दान करना और सफेद वस्त्र धारण करना भी शुभफल देने वाला माना जाता है।
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व्रत में आहार संबंधी नियम
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व्रत में आहार संबंधी नियम
- व्रती को दिनभर फलाहार करना चाहिए जैसे फल, दूध, साबूदाना, मूँगफली, या सिंघाड़े का आटा।
- अनाज, नमक, और तामसिक भोजन से दूर रहें।
- अगर निर्जल व्रत कठिन हो तो नारियल पानी या सामान्य जल का सेवन किया जा सकता है।
- दिनभर मन, वाणी और कर्म की पवित्रता बनाए रखें, किसी से कटुता, झूठ या क्रोध न करें।
- अधिक से अधिक समय शिव मंत्रों के जाप, ध्यान और भजन में लगाएं।
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व्रत का समापन और पारण
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व्रत का समापन और पारण
- सोमवार की शाम शिवजी की आरती करें और व्रत कथा का श्रवण करें।
- पूजन के पश्चात फल, खीर या फलाहार भगवान को अर्पित कर प्रसाद रूप में ग्रहण करें।
- व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद करें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।