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Sawan 2020: तीन पत्तियों वाला बिल्व पत्र क्यों है भगवान शिव को इतना प्रिय

Fri, 10 Jul 2020 03:46 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Fri, 10 Jul 2020 03:46 AM IST
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sawan 2020 Importance of bilvapatra in worship of Shiva
शिव को प्रिय है बिल्व पत्र

भगवान शिव की पूजा में यूं तो कई चीजों का उपयोग किया जाता है लेकिन कहा जाता है कि अगर शिव को अर्पित करने के लिए आपके पास कुछ भी न हो तो सिर्फ एक बेल की पत्ती चढ़ा देने मात्र से ही शिव प्रसन्न हो जाते हैं। लेकिन अगर सारी सामाग्री भी हो और बिल्व पत्र न हो तो भोलेनाथ की पूजा अधूरी मानी जाती है तो आखिर शिव को क्यों इतना प्रिय है बिल्व पत्र, जानते हैं...



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sawan 2020 Importance of bilvapatra in worship of Shiva
बेलवृक्ष के नीचे शिवलिंग रखकर पूजा करने से घर में सुख,समृद्धि आती है(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : amar ujala

महादेव को आशुतोष भी कहा गया है क्योंकि वे केवल एक  बिल्व पत्र चढ़ाने से भी प्रसन्न हो जाते है। बिल्व पत्र में तीन पत्तियां होती है जिन्हें तीनों देवों ब्रह्मा, विष्णु, महेश का प्रतीक मानते हैं। इस कारण भी बिल्व पत्र का विशेष महत्व है। कई पुराणो में इसकी महिमा बताई गई है तो वहीं शिव पुराण में भी इसका विस्तार से वर्णन किया गया है। शिवपुराण के अनुसार बिल्वपत्र स्वयं भगवान शिव का प्रतीक है। जो लोग बेल के वृक्ष के नीचे शिवलिंग रखकर पूजन करता है, तो उसके घर में हमेशा सुख-समृद्धि रहती है।

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बिल्वपत्र का महत्व(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Amar Ujala

पौराणिक कथा के अनुसार जब समुद्रमंथन के समय शिव जी ने हलाहल विष का पान किया था तब उनके कंठ की जलन को शांत करने के लिए बिल्व पत्र अर्पण किया गया था। ताकि विष का असर कम हो जाए। कहा जाता है कि तभी से शिव को बिल्व पत्र चढ़ाया जाता है। बिल्व पत्र की तीन पत्तियां भगवान शिव के तीन नेत्रों का भी प्रतीक हैं। इसलिए भी इसका बहुत महत्व है। 

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बिल्व पत्र चढ़ाने से भगवान शिव और माता पार्वती दोनों प्रसन्न होते हैं। प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media

कैसे हुई बिल्वपत्र की उत्पत्ति
स्कंद पुराण के अनुसार बेल के वृक्ष की उत्पत्ति माता पार्वती के ललाट की पसीने की बूंदो से हुई। एक बार माता पार्वती ने अपने ललाट से पसीने के पोंछकर फेंका तो कुछ बूंदे मंदार पर्वत पर जा गिरी। कहा जाता है कि उन्हीं से बेलवृक्ष की उत्पत्ति हुई। बेल के वृक्ष की जड़ में देवी गिरिजा, तने में महेश्वरी, पत्तियों में माता पार्वती, टहनियों में दक्षयायनी,फूलों में गौरी तो वहीं फलों में मां कात्यायनी निवास करती हैं। बिल्व पत्र चढ़ाने से भगवान शिव और माता पार्वती दोनों प्रसन्न होते हैं। 

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भगवान शिव - फोटो : अमर उजाला

बिल्व पत्र चढ़ाते समय इस मंत्र का जाप करें

'त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रयायुधम।
 त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम।


अर्थात् हे तीन गुणों तीन नेत्र, त्रिशूल को धारण करने वाले शिव जी में आपको तीन जन्मों के पापों का संहार करने वाले शिव में आपको बिल्वपत्र अर्पित करता हूं। 

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