सावन चल रहा है तो भक्त अपने भगवान से जुड़ी हर बात को जानना चाहता है। इसलिए सावन में हम आज आपको शिव जी के बारे में ऐसी कुछ बातें बताएंगे। जिनके बारे में शायद आप न जानते हो। आइए जानते हैं शिव से जुड़े रहस्य...
Sawan 2020: यकीन मानिए शिवजी से जुड़े इन रहस्यों को नहीं जानते होंगे आप
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भगवान भोलेनाथ का विवाह राजा दक्ष की पुत्री सती से हुआ था। परंतु उनके पिता के द्वारा भगवान शिव का अपमान करने पर उन्होंने यज्ञकुंड में अपनी आहुति दे दी थी। उसके बाद उन्होंने पार्वती जी के रुप में राजा हिमालय के यहां जन्म लिया और माता पार्वती के साथ शिव जी का विवाह हुआ। कहा जाता है कि गंगा, काली और उमा भी भगवान शिव की ही पत्नियां थी।
भगवान शिव से विवाह के बाद दोनों की शक्ति से कार्तिकेय का जन्म हुआ था। गणेश जी माता पार्वती के पुत्र थे। वे माता के उबटन से जन्में थे। भगवान शिव के तेज से जलंधर उत्पत्ति हुई थी। तो वहीं भूमा ने शिव जी के ललाट की पसीने की बूंद से जन्म लिया था। भगवान भोलेनाथ और मोहिनी के संयोग अय्यप्पा का जन्म हुआ था। भगवान भोलेनाथ के दो और पुत्र थे जिनका नाम अंधक और खुजा था। इन दोनों के बारे में कहीं पर ज्यादा उल्लेख नहीं किया गया है।
सप्तऋषियों को शिव का प्रारंभिक शिष्य कहा गया है। इन ऋषियों के द्वारा ही शिव के ज्ञान का प्रचार पूरे पृथ्वी लोक पर हुआ। कहा जाता है सर्वप्रथम शिव जी से ही गुरु और शिष्य के पवित्र रिश्तें की शुरुआत हुई थी। वशिष्ठ और अगस्त्य मुनि का नाम भी शिव के शिष्यों में लिया जाता है। सप्तऋषियों के अलावा गौरशिरस मुनि भी शिव के शिष्य थे।
भगवान शिव ने हर युग में भक्तों के दर्शन दिए हैं। सतयुग में समुद्र मंथन के समय भी शिव थे और उन्होंने समस्त सृष्टी के कल्याण के लिए विषपान किया था। त्रेता युग में भी राम के समय शिव थे। भगवान शिव द्वापर युग में महाभारत काल में भी थे। भविष्य पुराण में कहा गया है कि मरुभूमि पर राजा हर्षवर्धन को भगवान शिव ने दर्शन दिए थे। कलिकाल में विक्रमादित्य के काल में भी शिव के दर्शन होने का जिक्र मिलता है।