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Rishi Panchami 2020 Date: जानिए ऋषि पंचमी का महत्व, व्रत विधि और कथा

Sun, 23 Aug 2020 11:11 AM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Sun, 23 Aug 2020 11:11 AM IST
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rishi panchami 2020 date vrat katha puja vidhi Know the names of Saptarishis Tara Mandal why fasting is done
ऋषि पंचमी 2020 - फोटो : सोशल मीडिया

Rishi Panchami 2020: ऋषि पंचमी व्रत भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को रखा जाता है और यह तिथि आज 23 अगस्त को पड़ रही है। हिन्दू धर्म में ऋषि पंचमी एक शुभ त्योहार है। मान्यता अनुसार यह दिन विशेष रूप से भारत के ऋषियों का सम्मान करने के लिए हैं। ऋषि पंचमी का शुभ अवसर मुख्य रूप से सप्तऋषियों को समर्पित है। धार्मिक कथाओं के अनुसार ये सात ऋषि है, वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र और भारद्वाज। मान्यता के अनुसार, कहा जाता है कि ऋषि पंचमी का उपवास रखने वाले व्यक्ति का भाग्य पल भर मे बदल जाता है और पिछले व वर्तमान जीवन के सभी प्रकार के पापों से मुक्ति भी मिल जाती है।

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व्रत विधि 
  • ऋषि पंचमी के दिन घर में साफ-सफाई करें। 
  • पूजा घर मे भी विशेष सफाई करवाएं। 
  • विधि विधान से सात ऋषियों के साथ देवी अरुंधती की स्थापना करें।
  • सप्त ऋषियों की हल्दी, चंदन, पुष्प, अक्षत आदि से पूजा करें। 
  • पूरे विधि-विधान से पूजा करने के बाद ऋषि पंचमी व्रत कथा सुनें 
  • अंत ब्राह्मणों को भोजन करवाकर कर व्रत का उद्यापन करें।
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व्रत कथा 

उत्तरा नाम का एक ब्राह्मण था जो सुशीला नाम की अपनी पत्नी के साथ रहता था। उनकी बेटी विधवा हो गयी थी इस कारण उनके साथ ही रहती थी। एक रात को बेटी के सम्पूर्ण शरीर को चींटियां लग गईं। माता-पिता चिंता मे डूब गए । उन्होंने एक ऋषि को इस बारे में बताया। तब ऋषि ने बताया कि उनकी बेटी ने पूर्व जन्म में रजस्वला काल मे पाप किया था। जिसका दंड उसे अब उसके शरीर पर चीटियां लग कर मिल रहा है। ऋषि ने पापों की मुक्ति के लिए उस ब्राह्मण कन्या को ऋषि पंचमी का व्रत करने की सलाह दी। ब्राह्मण कन्या के व्रत करने से उसके सारे कष्ट दूर हो गए सभी पापों से मुक्ति मिल गयी और अगले जन्म में सौभाग्य की प्राप्ति हुई।

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ऋषि पंचमी पूजा मंत्र
कश्यपोत्रिर्भरद्वाजो विश्वामित्रोय गौतम:।
जमदग्निर्वसिष्ठश्च सप्तैते ऋषय: स्मृता:।।
गृह्णन्त्वर्ध्य मया दत्तं तुष्टा भवत मे सदा।।  
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