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Raksha Sutra Bandhne ke Niyam: कितने दिनों में बांधना चाहिए कलावा? जानें इससे जुड़े नियम

Thu, 27 Feb 2025 06:41 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Thu, 27 Feb 2025 06:41 AM IST
सार

Raksha Sutra Niyam: यदि आप भी रक्षा सूत्र पहनते हैं, तो आइए जानें कि इसे कितनी बार लपेटना चाहिए, कौन सा रक्षा सूत्र पहनना उचित नहीं है, और इसे बांधने के लिए क्या नियम हैं। 
 

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RakshaSutra Bandhne ke Niyam Vidhi and Laabh Know the rules of tying kalava
कलावा बांधने के नियम - फोटो : amar ujala

Kalawa Kaise Bandhein: हिंदू धर्म में किसी भी मांगलिक कार्य से पहले कलाई पर कलावा बांधने की परंपरा है, जिसे रक्षा सूत्र या मौली के नाम से भी जाना जाता है। यह प्रथा वैदिक संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और यज्ञ के दौरान इसे बांधने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। पौराणिक कथाओं में भी इसका उल्लेख मिलता है, जिसमें कहा गया है कि भगवान वामन ने असुरों के दानवीर राजा बलि की अमरता के लिए उनकी कलाई पर कलावा बांधा था। सनातन धर्म में किसी भी मांगलिक कार्यो के दौरान कलाई पर कलावा बांधा जाता है। इसे रक्षा सूत्र या मौली भी कहा जाता है। रक्षा सूत्र बांधना वैदिक परंपरा का हिस्सा रहा है। यदि आप भी रक्षा सूत्र पहनने का विचार कर रहे हैं, तो आइए जानते हैं कि इसे कितनी बार लपेटना चाहिए, कौन सा रक्षा सूत्र नहीं पहनना चाहिए और इसे बांधने के नियम क्या हैं।



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RakshaSutra Bandhne ke Niyam Vidhi and Laabh Know the rules of tying kalava
कलावा बांधने के नियम - फोटो : adobe stock

कलावा कब बांधना चाहिए 
 रक्षा सूत्र कलावा हम किसी भी वार को बांध सकते हैं लेकिन जिस वार को रक्षा सूत्र बांधे उस दिन का शुभ मुहूर्त जरूर देख लेना चाहिए। लेकिन रक्षा सूत्र जब हाथ के बंधे हुए 21 दिन से ज्यादा हो जाए अर्थात पुराना हो जाए तो उसे उतारने के लिए मंगलवार व शनिवार का दिन सबसे अच्छा माना गया है।

 

RakshaSutra Bandhne ke Niyam Vidhi and Laabh Know the rules of tying kalava
adobe stock - फोटो : amar ujala

कलावा बांधने के लाभ 

  • शास्त्रों में व पौराणिक कथाओं में कलावा को रक्षा सूत्र के रूप में धारण किया जाता है। रक्षाबंधन पर जब हम अपनी बहनों से रक्षा सूत्र बंधवाते हैं तो यह रक्षा सूत्र हमें उनकी रक्षा हेतु कर्तव्य पालन का बोध करवाता है।
  •  धार्मिक दृष्टिकोण से यह त्रिदेव ब्रह्मा विष्णु महेश का सूचक भी माना गया है, इसे विधिवत रूप से बांधने से त्रिदेवों की कृपा बनी रहती है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है।
  •  स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से कलावा बांधने से ब्लड प्रेशर (बीपी), डायबिटीज, हार्ट संबंधित समस्याओं में व अन्य शारीरिक समस्याओं में भी लाभ मिलता है।
  •  विधिवत नियम पूर्वक कलावा बांधने से मंगल व गुरु ग्रह की अनुकूलता भी प्राप्त होती है।

 

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RakshaSutra Bandhne ke Niyam Vidhi and Laabh Know the rules of tying kalava
कलावा बांधने के नियम - फोटो : adobe stock

रक्षा सूत्र कितने दिनों तक पहनना चाहिए 
अक्सर देखा गया है कि लोग रक्षासूत्र पहनने के बाद उसे कई महीनों तक बांधें रहते हैं। हालांकि ये करना सही नहीं है। शास्त्र अनुसार, ज्यादा दिन तक हाथ में रहने वाले कलावे का जब रंग उतरने लगता है तो उसकी ऊर्जा भी कम होने लगती है और एक समय बाद खत्म हो जाती है, इसलिए हाथ में कलावा 21 दिनों से ज्यादा नहीं रखना चाहिए। 21 दिन के बाद इसे उतारकर नया कलावा शुभ मुहूर्त में बांधना चाहिए। 

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कलावा बांधने के नियम - फोटो : adobe stock

न बांधें ऐसा कलावा 

  • शास्त्रों के अनुसार जिस कलावा का रंग उतर गया है, उसे नहीं बांधना चाहिए। 
  • 21 दिनों के बाद फिर किसी शुभ मुहुर्त में इसे बंधवा सकते हैं।  
  • हाथ से उतारा हुआ रक्षा सूत्र बहती नदी में प्रवाहित करना चाहिए। 
  • यदि यह संभव न हो सके तो किसी पेड़ की जड़ में छोटा सा गड्ढा खोद कर डाल देना चाहिए।
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