प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंचे। अपने दो दिन के दौरे में जहां पीएम मोदी कई परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे, वहीं आज शाम दुर्गा माता मंदिर और तुलसी मानस मंदिर भी जाएंगे। गौरतलब है कि पीएम मोदी भी कई वर्षों से नवरात्रि के व्रत रख रहे हैं। प्रधानमंत्री आज शारदीय नवरात्रि की द्वितीया को जिस मंदिर में आज विशेष पूजा करने वाले हैं। वहां पर मां महायंत्र स्थापित की गई है। इस मंदिर को मंकी मंदिर भी जाता है। जानें इसके पीछे कारण
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तुलसी मानस मंदिर से कुछ ही दूर पर स्थित दुर्गा माता मंदिर का निर्माण 18वीं सदीं में बंगाल की महारानी ने करवाया था। लाल रंग से रंगे इस मंदिर के पास ही दुर्गा कुंड भी है। इस मंदिर को मंकी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।
मंकी मंदिर नाम पड़ने से पीछे माना जाता है कि ये क्षेत्र पहले वनों से ढ़का रहता था, जिस वजह से यहां अधिक मात्रा में बंदर भी थे। जैसे -जैसे यहां आबादी बढ़ने लगी, वैसे-वैसे बंदरों की संख्या भी कम होने लगी। नागर शैली में बने इस मंदिर के पीछे एक कथा यहां की राजकुमारी के स्वयंवर से भी जुड़ी है।
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देवी भागवत पुराण के 23वें अध्याय के अनुसार काशी नरेश ने अपनी बेटी शशिकला के विवाह के लिए स्वयंवर आयोजित करवाया। तभी उन्हें मामूल चला कि उनकी बेटी वनवासी राजुकमार सुदर्शन से प्रेम करती है। ऐसे में काशी नरेश ने चुपचाप बेटी की शादी सुदर्शन से करवा दी। इस वजह से स्वयंवर में आए राजा नाराज हो गए और काशी नरेश को युद्ध के लिए ललकारा। काशी नरेश और वनवासी राजकुमार ने युद्ध की चुनौती स्वीकार किया और मां दुर्गा का आह्वान किया। कहा जाता है कि मां दुर्गा शेर पर सवार होकर युद्ध् में आई।
माना जाता है कि इस युद्ध के बाद काशी नरेश ने वाराणसी की सुरक्षा के लिए मां से विनती की, जिसके बाद यहां पर मां का मंदिर बना। मंदिर लाल और गेरूआ रंग से रंगा हुआ है। मंदिर के समीप ही कुंड भी बना हुआ है।