बप्पा को विदाई देने का यह अवसर भावुक होने के साथ-साथ धार्मिक दृष्टि से भी खास माना जाता है। विसर्जन से पहले भक्त विधि-विधान से पूजा करते हैं, आरती उतारते हैं और सुख-समृद्धि की कामना के साथ गणपति बप्पा को विदा करते हैं। इसी दौरान कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि विसर्जन के समय गणेश जी की मूर्ति का चेहरा किस दिशा में होना चाहिए और क्या इसके लिए कोई विशेष नियम बताए गए हैं। धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक प्रथाओं में गणेश जी की दिशा को लेकर अलग-अलग मत मिलते हैं। ऐसे में अगर आप भी गणेश विसर्जन की तैयारी कर रहे हैं, तो यह जानना जरूरी है कि परंपरागत रूप से किन बातों का ध्यान रखा जाता है। आइए जानते हैं गणेश विसर्जन 2026 के दौरान बप्पा को विदा करते समय मूर्ति का चेहरा किस ओर रखने की मान्यता है और विसर्जन से पहले किन जरूरी नियमों का पालन किया जाता है।
गणेश विसर्जन 2026: बप्पा को विदा करते समय मूर्ति का चेहरा किस ओर रखें? जानें क्या कहते हैं नियम
गणेश विसर्जन 2026 के मौके पर भक्त बप्पा को श्रद्धा और विधि-विधान के साथ विदाई देते हैं। मान्यता है कि विसर्जन से पहले गणेश जी की मूर्ति की दिशा का भी विशेष महत्व होता है। जानिए बप्पा का चेहरा किस ओर रखना शुभ माना जाता है और क्या हैं पारंपरिक नियम।
कब है अनंत चतुर्दशी
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर को मनाया गया, जबकि अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को पड़ रही है। इसी दिन गणपति विसर्जन का सबसे प्रमुख अवसर माना जाता है। हालांकि, कई स्थानों पर डेढ़ दिन, तीसरे, पांचवें और सातवें दिन भी गणेश प्रतिमा का विसर्जन करने की परंपरा है। विसर्जन की तैयारियों के बीच भक्तों के मन में एक सवाल अक्सर आता है कि बप्पा को घर से विदा करते समय गणेश जी की प्रतिमा का मुख किस दिशा में होना चाहिए? इसको लेकर अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं और पारिवारिक परंपराएं प्रचलित हैं। आइए जानते हैं इस संबंध में क्या मान्यता है और विसर्जन के दौरान किन बातों का ध्यान रखा जा सकता है।
विसर्जन के समय किस दिशा में रखें गणेश जी का मुख?
प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, गणेश प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाते समय बप्पा का मुख भक्तों की ओर या उत्तर दिशा की ओर रखने की बात कही जाती है। धार्मिक परंपराओं में उत्तर दिशा को विशेष महत्व प्राप्त है। इसे कुबेर और देवगुरु बृहस्पति से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि उत्तर दिशा ज्ञान, समृद्धि और सकारात्मकता से संबंधित है। इसी वजह से कुछ परिवार विसर्जन के समय गणपति की प्रतिमा का मुख उत्तर दिशा की ओर रखने की परंपरा का पालन करते हैं। हालांकि, इसे सभी स्थानों पर लागू होने वाला अनिवार्य नियम नहीं माना जाता।
घर से बप्पा को विदा करते समय इन बातों का रखें ध्यान
- गणपति विसर्जन से पहले भगवान गणेश की विधिवत पूजा और आरती करना शुभ माना जाता है।
- पूजा के बाद बप्पा को फल, मोदक या परिवार की परंपरा के अनुसार भोग लगाया जा सकता है।
- इसके बाद परिवार के सदस्य भगवान गणेश से सुख, शांति, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं।
- मूर्ति को घर से बाहर ले जाते समय जल्दबाजी करने के बजाय श्रद्धा और सम्मान के साथ विदाई देनी चाहिए।
- गणेश प्रतिमा के साथ यदि ऐसी सजावटी वस्तुएं लगी हों जो पानी में आसानी से न घुलें, तो उन्हें विसर्जन से पहले अलग कर देना बेहतर है।
- यदि घर में स्थापित छोटी मिट्टी की गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया जा रहा है, तो इसके लिए साफ पानी से भरे किसी पात्र का इस्तेमाल किया जा सकता है।
- इससे घर पर ही पारंपरिक तरीके से विसर्जन की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
क्या शास्त्रों में विसर्जन की दिशा अनिवार्य है?
गणेश प्रतिमा के मुख की दिशा को लेकर अलग-अलग मान्यताएं देखने को मिलती हैं। हालांकि, हर दिशा से जुड़े नियम को शास्त्रों का अनिवार्य आदेश मानना उचित नहीं है। कई बार ये बातें स्थानीय परंपराओं, परिवार की मान्यताओं और धार्मिक आचार-विचार पर आधारित होती हैं। इसलिए यदि आपके परिवार में गणपति विसर्जन के समय किसी विशेष दिशा या विधि का पालन वर्षों से किया जा रहा है, तो उस परंपरा को भी जारी रखा जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात श्रद्धा, सम्मान और शांतिपूर्ण तरीके से बप्पा को विदाई देना है। किसी एक दिशा को लेकर अनावश्यक चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।