Pitru Paksha 2025: भाद्रपद के अंतिम दिन पूर्णिमा से आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की सर्वपितृ अमावस्या तक पितरों का श्राद्ध पक्ष रहता है। इसे पितृपक्ष भी कहते हैं। श्राद्ध पक्ष में पितरों की तिथि विशेष के दिन शास्त्र द्वारा निर्धारित समय में श्राद्ध कर्म करते हैं। इस दौरान तर्पण, पिंडदान और पंचबलि कर्म किया जाता है। जानते हैं विस्तार से।
इस बार श्राद्ध पक्ष के दिन चंद्र ग्रहण रहेगा। इसलिए इसके सूतक काल के पूर्ण ही श्राद्ध कर लें। दोपहर 12 बजकर 57 मिनट पर सूत काल प्रारंभ होगा। इसी दिन शतभिषा नक्षत्र में सुकर्मा और धृति योग रहेगा। शास्त्रों के अनुसार अपराह्न काल, कुतुप, रोहिणी और अभिजीत काल में श्राद्ध करना चाहिए। यही श्राद्ध करने का सही समय है। इस दिन यदि गजच्छाया योग हो तो और भी अति उत्तम होता है।
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श्राद्ध पक्ष में कब करें तर्पण, पिंडदान और पंचबलि कर्म?
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1. अपराह्न काल: शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध कर्म अपराह्न काल में करना चाहिए। अपराह्न काल दोपहर 12 बजे के बाद से शुरू होकर, शाम ढलने या सूर्यास्त होने से पहले तक के समय को कहते हैं।
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श्राद्ध पक्ष में कब करें तर्पण, पिंडदान और पंचबलि कर्म?
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2. कुतुप काल: कुतुप काल में श्राद्ध करना भी शुभ माना जाता है। कुतुप काल दिन के 11:30 बजे से 12:30 के मध्य का समय होता है। स्थानीय समय अनुसार 1 से 3 मिनट की घटबढ़ रहती है। वैसे 'कुतुप बेला' दिन का आठवां मुहूर्त होता है। पाप का शमन करने के कारण इसे 'कुतुप' कहा गया है।
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श्राद्ध पक्ष में कब करें तर्पण, पिंडदान और पंचबलि कर्म?
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3. अभिजीत मुहूर्त: बुधवार को छोड़कर प्रत्येक वार को अभिजीत मुहूर्त रहता है। अभिजीत मुहूर्त भी उपरोक्त काल के मध्य का समय ही होता है।
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श्राद्ध पक्ष में कब करें तर्पण, पिंडदान और पंचबलि कर्म?
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4. रोहिणी नक्षत्र: रोहिणी काल अर्थात रोहिणी नक्षत्र काल के दौरान श्राद्ध किया जा सकता है। यदि रोहिणी नक्षत्र नहीं हो तो उपरोक्त काल में श्राद्ध कर्म करें।
- शैली प्रकाश