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Pitru Paksha 2024: पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण में क्या होता है अंतर? यहां जानिए सही विधि

Fri, 20 Sep 2024 12:41 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति मेहरा Updated Fri, 20 Sep 2024 12:41 PM IST
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Pitru Paksha 2024 difference between tarpan pind daan and shradh in hindi
पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण में अंतर - फोटो : Amar Ujala

Pitru Paksha 2024: पितृ पक्ष का समय पितरों को समर्पित होता है। इन 15 दिनों में लोग अपने पितरों को श्रद्धांजलि देते हैं और तर्पण एवं श्राद्ध कर्म करके उन्हें संतुष्ट करते हैं। इस दौरान मृत पूर्वजों या पितरों के निमित्त श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण जैसे अनुष्ठान का बहुत महत्व है। माना जाता है कि श्राद्ध पक्ष में किए इन कार्यों से पितर प्रसन्न होते हैं और अपने परिजनों को आशीर्वाद देते हैं।



पितृ पक्ष की शुरुआत 18 सितंबर 2024 से हो चुकी है और यह 2 अक्तूबर 2024 तक चलेंगे। पितरों की आत्मा की शांति के लिए लोग कई तरह के कर्मकांड करते हैं, जिसमें पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। अपने वंश द्वारा किए गए इन कर्मकांडों से पितृ प्रसन्न होते हैं और उनकी आत्मा को शांति मिलती है।

कई बार लोग पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण को एक कार्य समझते हैं। क्योंकि ये सभी कार्य पितृ पक्ष के दौरान ही किए जाते हैं। लेकिन असल में ये तीनों एक नहीं हैं। इन सभी क्रियाओं की विधियां भी अलग-अलग होती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध में क्या अंतर है।

Pitru Paksha 2024 difference between tarpan pind daan and shradh in hindi
पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण में अंतर - फोटो : freepik

क्या है तर्पण?
तर्पण का अर्थ जल का अर्पण करना है। तर्पण करते समय पितरों के लिए जल, दूध, तिल और कुश का अर्पण किया जाता है। माना जाता है कि इससे पितृ संतुष्ट होते हैं और पितृ पक्ष के दौरान इसे किसी भी दिन किया जा सकता है। तर्पण विधि में जल के साथ तिल मिश्रित कर इसे पितरों, देवताओं और ऋषियों को तृप्त करने के लिए अर्पित किया जाता है।

Pitru Paksha 2024 difference between tarpan pind daan and shradh in hindi
पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण में अंतर - फोटो : Amar Ujala

क्या है पिंडदान? 
पितरों को मोक्ष की प्राप्ति कराने के लिए पिंडदान को सबसे सहज मार्ग माना गया है। पिंडदान का अर्थ है, पितरों को भोजन प्रदान करना। यह पितरों की आत्मा को श्रद्धांजलि देने से जुड़ा एक अनुष्ठान है। पिंडदान को बहुत जरूरी माना जाता है, क्योंकि इसके द्वारा पितरों की मोह माया छूट जाती है और वह आगे की यात्रा शुरू करते हैं।

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Pitru Paksha 2024 difference between tarpan pind daan and shradh in hindi
पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण में अंतर - फोटो : Amar Ujala

देशभर में पिंडदान करने के लिए कई पवित्र स्थल मौजूद हैं, लेकिन इसके लिए बिहार स्थित गया जी को पूर्वजों के पिंडदान के लिए सबसे श्रेष्ठ माना गया है। गया जी समेत हरिद्वार, जगन्नाथपुरी, पुष्कर, कुरुक्षेत्र, चित्रकूट आदि जगहों पर लोग विधि-विधान के साथ पिंडदान करते हैं।

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पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण में अंतर - फोटो : Amar Ujala

क्या है श्राद्ध?
पितृ पक्ष में पितरों के लिए किया जाने वाला श्राद्धकर्म एक विस्तृत कर्मकांड है। यह पिरतों के लिए एक मुक्ति मार्ग कहलाता है। श्राद्ध में ब्राह्मण पिंडदान, हवन, भोजन और दान जैसे अनुष्ठान करते हैं। श्राद्ध करने के लिए श्राद्धकर्ता को विधि विधान और नियमों का पालन करना पड़ता है। इसमें पंचबली का भी बड़ा महत्व है, जिसमें गाय, कौआ, देवता, कुत्ता और चींटियों को भोजन अर्पित किया जाता है।


 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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