पं. निश्चल शास्त्री
Pitru Paksha 2024: पितृ पक्ष में पितरों का तर्पण नहीं करने पर आती हैं मुसीबतें, जानिए श्राद्ध क्यों जरूरी ?
क्यों जरूरी है श्राद्ध?
यह सर्वविदित है कि मृत प्राणी इस महाप्रयाण में अपना स्थूल शरीर भी अपने साथ नहीं ले जा सकता है। तब इस महायात्रा में अपने लिए पाथेय (अन्न-जल) कैसे ले जा सकता है? उस समय उसके सगे-संबंधी श्राद्ध विधि से उसे जो कुछ देते हैं, वही उसे मिलता है। शास्त्र में मरणोपरांत पिंडदान की व्यवस्था बनाई गई है। सर्वप्रथम शवयात्रा के अंतर्गत छह पिंड दिए जाते हैं, जिनसे भूमि के अधिष्ठातृ देवताओं की प्रसन्नता और भूत-पिशाचों द्वारा होने वाली बाधाओं के निराकरण आदि प्रयोजन सिद्ध होते हैं। इसके साथ ही दशगात्र में दिए जाने वाले दस पिंडों के द्वारा जीव को आतिवाहिक सूक्ष्म शरीर की प्राप्ति होती है। यह मृत व्यक्ति की महायात्रा के प्रारंभ की बात हुई।
श्राद्ध करना इसलिए भी आवश्यक है, क्योंकि जो प्राणी विधिपूर्वक शांत चित्त और श्रद्धावनत होकर श्राद्ध करता है, वह सभी प्रकार के पापों से रहित होकर मोक्ष को प्राप्त होता है। फिर इस संसार चक्र में नहीं आता। इसलिए सभी धर्मप्राण लोगों को पितृगण की संतुष्टि और अपने कल्याण के लिए भी श्राद्ध अवश्य करना चाहिए। इस संसार में श्राद्ध करने वाले के लिए श्राद्ध से श्रेष्ठ अन्य कोई कल्याणकारी उपाय नहीं है। इस तथ्य की पुष्टि महर्षि सुमन्तु द्वारा भी की गई है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।