फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Papmochani Ekadashi 2021 date time shubh muhurat importance vrat puja vidhi and ekadashi katha

Papmochani Ekadashi Vrat 2021: सारे पापो का नाश करती है पापमोचनी एकादशी, जानें तिथि, महत्व और व्रत पूजा विधि

Sat, 27 Mar 2021 12:03 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Sat, 27 Mar 2021 12:03 PM IST
विज्ञापन
Papmochani Ekadashi 2021 date time shubh muhurat importance  vrat puja vidhi and ekadashi katha
पापमोचनी एकादशी 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)

प्रत्येक माह में दोनों पक्षों शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की ग्याहरवीं तिथि को एकादशी का व्रत किया जाता है। इस तरह से पूरे वर्ष में कुल मिलाकर 24 एकादशी पड़ती हैं। एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु के पूजन का विधान है। सनातन धर्म में एकादशी के व्रत को सभी व्रतो में श्रेष्ठ बताया है। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी दो प्रमुख त्योहारो होली और नवरात्रि के मध्य समय में पड़ती है। इस बार पापमोचनी एकादशी 07 अप्रैल 2021 दिन बुधवार को पड़ रही है। जानते हैं पापमोचनी एकादशी का महत्व, शुभ समय और व्रत विधि।

विज्ञापन

Papmochani Ekadashi 2021 date time shubh muhurat importance  vrat puja vidhi and ekadashi katha
पापमोचनी एकादशी 2021 का शुभ मुहूर्त और महत्व (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media

पापमोचनी एकादशी का शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि आरंभ- 07 अप्रैल 2021 प्रातः तड़के 02 बजकर 09 मिनट से
एकादशी तिथि समाप्त- 08 अप्रैल 2021 प्रातः 02 बजकर 28 मिनट पर
हरिवासर समाप्ति समय- 08 अप्रैल को सुबह 08 बजकर 40 मिनट पर 
एकादशी व्रत पारण समय- 08 अप्रैल को दोपहर 01 बजकर 39 मिनट से शाम 04 बजकर 11 मिनट तक

पापमोचनी एकादशी का महत्व
पापमोचनी इस एकादशी के नाम से ही सिद्ध होता है, पापों का नाश करने वाली। जो मनुष्य तन मन की शुद्धता और नियम के साथ पापमोचनी एकादशी का व्रत करता है और जीवन में गलत कार्यों को न करने का संकल्प करता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। जिससे उसे सभी दुखों से छुटकारा मिलता है और मनुष्य को मानसिक शांति प्राप्ति होती है। पाप मोचनी एकादशी का व्रत करने वाला व्यक्ति शांतिपूर्ण और सुखी जीवन व्यतीत करता है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

Papmochani Ekadashi 2021 date time shubh muhurat importance  vrat puja vidhi and ekadashi katha
पापमोचनी एकादशी 2021 व्रत की विधि (प्रतीकात्मक तस्वीर)

पापमोचनी एकादशी व्रत की विधि

  • हर एकादशी के समान पापमोचनी एकादशी के विभिन्न अनुष्ठान और नियम भी दशमी के दिन यानि एकादशी तिथि से एक दिन पहले से ही आरंभ हो जाते हैं। 
  • एकादशी से एक दिन पहले सूर्य डूबने के बाद भोजन न करें और सुबह उठकर स्नान करने के पश्चात व्रत का संकल्प लें। 
  • इसके बाद भगवान विष्णु के सामने धूप दीप जलाएं।
  • विष्णु जी को चंदन का तिलक लगाएं और पुष्प, प्रसाद अर्पित करें।
  • इसके बाद भगवान विष्णु की आरती करें और एकादशी व्रत के महातम्य की कथा पढ़ें। 
  • पूरे दिन भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत करें।
  • दूसरे दिन द्वादशी तिथि पर सुबह पूजन करने के बाद ब्राह्मण या किसी जरूरतमंद को भोजन कराएं।
  • उन्हें दान दक्षिणा देकर विदा करें और पारण काल में स्वयं भी व्रत का पारण करें।

विज्ञापन

Papmochani Ekadashi 2021 date time shubh muhurat importance  vrat puja vidhi and ekadashi katha
पापमोचनी एकादशी 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
पापमोचनी एकादशी व्रत की पौराणिक कथा
धार्मिक मान्यता के अनुसार पुरातन काल में चैत्ररथ नामक एक बहुत सुंदर वन था। इस वन में च्यवन ऋषि के पुत्र मेधावी ऋषि तपस्या किया करते थे। इसी वन में देवराज इंद्र गंधर्व कन्याओं, अप्सराओं और देवताओं के साथ विचरण करते थे। मेधावी ऋषि शिव भक्त थे लेकिन अप्सराएं शिवद्रोही कामदेव की अनुचरी थी. इसलिए एक समय कामदेव ने मेधावी ऋषि की तपस्या भंग करने के लिए मंजू घोषा नामक अप्सरा को भेजा। उसने अपने नृत्य, गायन और सौंदर्य से मेधावी मुनि का ध्यान भंग कर दिया और मुनि मेधावी मंजूघोषा अप्सरा पर मोहित हो गए। इसके बाद अनेक वर्षों तक मुनि ने मंजूघोषा के साथ विलास में समय व्यतीत किया। बहुत समय बीत जाने के पश्चचात मंजूघोषा ने वापस जाने के लिए अनुमति मांगी, तब मेधावी ऋषि को अपनी भूल और तपस्या भंग होने का आत्मज्ञान हुआ।

जब ऋषि को ज्ञात हुआ कि मंजूघोषा ने किस प्रकार से उनकी तपस्या को भंग किया है तो क्रोधित होकर उन्होंने मंजूघोषा को पिशाचनी होने का श्राप दे दिया। इसके बाद अप्सरा ऋषि के पैरों में गिर पड़ी और श्राप से मुक्ति का उपाय पूछा। मंजूघोषा के बार-बार विनती करने पर मेधावी ऋषि ने उसे श्राप से मुक्ति पाने के लिए बताया कि पापमोचनी एकादशी का व्रत करने से तुम्हारे समस्त पापों का नाश हो जाएगा और तुम पुन:अपने पूर्व रूप को प्राप्त करोगी। अप्सरा को मुक्ति का मार्ग बताकर मेधावी ऋषि अपने पिता के महर्षि च्यवन के पास पहुंचे। श्राप की बात सुनकर च्यवन ऋषि ने कहा कि- ''हे पुत्र यह तुमने अच्छा नहीं किया, ऐसा कर तुमने भी पाप कमाया है, इसलिए तुम भी पापमोचनी एकादशी का व्रत करो। इस प्रकार पापमोचनी एकादशी का व्रत करके अप्सरा मंजूघोषा को श्राप से मुक्ति मिल गई और मेधावी ऋषि के भी सभी पापों से मुक्ति प्राप्त हो गई।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed