श्रीराम जन्मभूमि को लेकर बेदम हैं ओली के दावे, इन तथ्यों से निकलती है ओली की बोली की हवा
भगवान श्रीराम का जन्म अयोध्या नगरी (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। इस तथ्य को कोई भी नकार नहीं सकता है। भारतीय पौराणिक, ऐतिहासिक और पुरातात्विक ये सभी प्रमाण दावा करते हैं कि भगवान श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या है।
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भगवान श्रीराम का जन्म अयोध्या नगरी (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। इस तथ्य को कोई भी नकार नहीं सकता है। लेकिन पड़ोसी देश नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली भगवान श्रीराम का जन्म नेपाल में बता रहे हैं। ओली के इस बेतुके बयान से न केवल करोड़ों भारतीयों की आस्था को ठेस पहुंची है, बल्कि उनके दावे भी पूरी तरह से निराधार साबित होते हैं।
दरअसल इस विवाद को हवा तब मिली जब नेपाल के प्रधानमंत्री ने वहां के प्रसिद्ध कवि भानुभक्त आचार्य की 206वीं जयंती के मौके पर ये कहा कि भगवान श्रीराम का जन्म उत्तर प्रदेश की अयोध्या में नहीं, बल्कि नेपाल में हुआ था। आपको बता दें कि भानुभक्त आचार्य ने वाल्मीकि रामायण का नेपाली में अनुवाद किया था।
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली ने कहा कि भगवान श्रीराम नेपाली हैं। उनके अनुसार जिस अयोध्या का रामायण में जिक्र है वो अयोध्या नेपाल के बिर्गुंज में स्थित थी। बिर्गुंज नेपाल का एक छोटा सा शहर है जो बिहार और नेपाल बॉडर के पास स्थित है। हालांकि ओली का यह दावा बहुत ही बचकाना है।
अपने दावे को मजबूत बनाने के लिए उन्होंने जो प्रमाण दिया है वह भी हास्यास्पद है। उन्होंने कहा कि उस समय उत्तर प्रदेश स्थित अयोध्या और जनकपुर (नेपाल) के बीच यात्रा करना असंभव था। ओली के इस दावे को अगर सही भी माना जाए तो इस हिसाब से तो प्रभु श्रीराम श्रीलंका भी नहीं गए होंगे।
भारत की सर्वोच्च अदालत का फैसला
ओली ने अपने दावे को ठोस बनाने के लिए न तो कोई ऐतिहासिक प्रमाण बताया और न ही पुरातात्विक प्रमाण का जिक्र किया। जबकि हिन्दू धार्मिक ग्रंथों में सभी तरह के प्रमाण इस बात को सिद्ध करते हैं कि प्रभु श्रीराम का जन्म सरयू नदी के तट बसे अयोध्या नगर में ही हुआ था।
2019 में राम मंदिर को लेकर भारत की सर्वोच्च अदालत का जो फैसला आया था, उस फैसले का आधार भी वाल्मीकि रामायण, स्कंद पुराण, पद्मपुराण, महाभारत और रामचरितमानस जैसे ग्रंथ थे। कोर्ट ने भी अपने फैसले में माना था कि भगवान श्रीराम का जन्म अयोध्या में ही हुआ था।
अयोध्या नगरी को लेकर पौराणिक शास्त्र हैं जीते-जागते प्रमाण
प्रभु श्रीराम के जन्मस्थली के कारण अयोध्या सदियों से हिन्दुओं की आस्था का प्रमुख केन्द्र रहा है। पौराणिक, ऐतिहासिक और पुरातात्विक ये सभी प्रमाण दावा करते हैं कि भगवान श्रीराम का जन्म उत्तर प्रदेश की अयोध्या नगरी में ही हुआ था। स्कंद पुराण के अयोध्या महात्म्य के वैष्णवकांड के 18-19वें श्लोक लिखा है कि वशिष्ठ आश्रम से उत्तर और लोमश आश्रम के पश्चिम में और विघ्नेश्वर से पूर्व में वो भूमि है जहां राम का जन्म हुआ था।
वहीं वाल्मीकि रामायण के बालकांड के 18वें अध्याय के 8-12 नंबर तक के श्लोक में रामजन्म और अयोध्या का वर्णन आता है। भारत-नेपाल का संबंध रोटी-बेटी का है। नेपाल स्थित जनकपुर प्रभु श्रीराम का सुसराल है। यहीं पर सीता का स्वयंवर हुआ था और इस स्वयंवर में प्रभु श्रीराम ने धनुष तोड़ा था। माता सीता से जुड़े होने के कारण जनकपुर नेपाल और भारत में रहने वाले करोड़ों हिन्दुओं का आस्था का केन्द्र है।