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Navratri 2024: मां के गर्भ के नौ माह और नवग्रह से नवरात्रि पर्व का गहरा संबंध
Wed, 09 Oct 2024 04:26 PM IST
ज्योति मेहरा
कृष्णा मिश्रा, इंदौर
कृष्णा मिश्रा, इंदौर
Published by: ज्योति मेहरा
Updated Wed, 09 Oct 2024 04:26 PM IST
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नवग्रह से नवरात्रि का संबंध
- फोटो : Amar Ujala
Navratri 2024: नवग्रहों और मां के गर्भ में बच्चे के नौ महीनों का गहरा संबंध नवरात्रि पर्व से जुड़ा हुआ है। नवरात्रि का पर्व मौसमों के मिलन के पहले नौ दिनों का प्रतीक है, जिसे नवरात्रि कहा जाता है। साल में चार मुख्य नवरात्रियां होती हैं, जिनमें से दो गुप्त और आध्यात्मिक साधकों के लिए मानी जाती हैं, जबकि दो गृहस्थ लोगों के लिए होती हैं।
chakra of body
- फोटो : freepik
शरीर के सात चक्रों से संबंध
नवरात्रि का संबंध न केवल ग्रहों से है, बल्कि शरीर के सात मुख्य चक्रों से भी है। हर दिन देवी का एक रूप, एक विशिष्ट चक्र की ऊर्जा से जुड़ा होता है:
1. मूलाधार चक्र – शैलपुत्री: ग्रह- शनि (तत्व- पृथ्वी)
आलस्य रूपी नकारात्मकता को उत्साह की ऊर्जा में बदलती हैं।
2. स्वाधिष्ठान चक्र – ब्रह्मचारिणी: ग्रह- गुरु (जल तत्व)
कामुक विचारों का नाश कर रचनात्मक प्रवृत्ति को बढ़ाती हैं।
3. मणिपुर चक्र – चंद्रघंटा: ग्रह- मंगल अग्निसार (तत्व अग्नि)
ईर्ष्या को दूर कर उदार भाव पैदा करती हैं।
(कहावत: "वो तरक्की कर रहा है, तेरा पेट क्यों दुख रहा है?")।
4. ह्रदय चक्र – कुष्मांडा: ग्रह- शुक्र (तत्व वायु)
भय को दूर कर प्रेम को बढ़ाती हैं।
(डर लगने पर आपका हाथ अपने आप छाती पर चला जाता है।)
5. विशुद्धि चक्र – स्कंदमाता: ग्रह- बुध (आकाश तत्व)
अभिव्यक्ति की शुद्धता और सत्यता का प्रतीक हैं।
6. आज्ञा चक्र – कात्यायनी, महागौरी और कालरात्रि: ग्रह- सूर्य,चंद्रमा
क्रोध का विनाश कर सजगता बढ़ाती हैं।
(क्रोध आने पर आपकी भौंहें सिकुड़ जाती हैं, और कुछ याद करना हो तो आपकी उंगली आज्ञा चक्र पर स्वतः चली जाती है।)
7. सहस्रार चक्र – सिद्धिदात्री: (सभी ग्रह वश में)
परम आनंद और परम शांति का स्थान।
नवरात्रि का संबंध न केवल ग्रहों से है, बल्कि शरीर के सात मुख्य चक्रों से भी है। हर दिन देवी का एक रूप, एक विशिष्ट चक्र की ऊर्जा से जुड़ा होता है:
1. मूलाधार चक्र – शैलपुत्री: ग्रह- शनि (तत्व- पृथ्वी)
आलस्य रूपी नकारात्मकता को उत्साह की ऊर्जा में बदलती हैं।
2. स्वाधिष्ठान चक्र – ब्रह्मचारिणी: ग्रह- गुरु (जल तत्व)
कामुक विचारों का नाश कर रचनात्मक प्रवृत्ति को बढ़ाती हैं।
3. मणिपुर चक्र – चंद्रघंटा: ग्रह- मंगल अग्निसार (तत्व अग्नि)
ईर्ष्या को दूर कर उदार भाव पैदा करती हैं।
(कहावत: "वो तरक्की कर रहा है, तेरा पेट क्यों दुख रहा है?")।
4. ह्रदय चक्र – कुष्मांडा: ग्रह- शुक्र (तत्व वायु)
भय को दूर कर प्रेम को बढ़ाती हैं।
(डर लगने पर आपका हाथ अपने आप छाती पर चला जाता है।)
5. विशुद्धि चक्र – स्कंदमाता: ग्रह- बुध (आकाश तत्व)
अभिव्यक्ति की शुद्धता और सत्यता का प्रतीक हैं।
6. आज्ञा चक्र – कात्यायनी, महागौरी और कालरात्रि: ग्रह- सूर्य,चंद्रमा
क्रोध का विनाश कर सजगता बढ़ाती हैं।
(क्रोध आने पर आपकी भौंहें सिकुड़ जाती हैं, और कुछ याद करना हो तो आपकी उंगली आज्ञा चक्र पर स्वतः चली जाती है।)
7. सहस्रार चक्र – सिद्धिदात्री: (सभी ग्रह वश में)
परम आनंद और परम शांति का स्थान।
शारदीय नवरात्रि 2024
- फोटो : adobe stock
सभी साधकों का लक्ष्य जप, तप, और व्रत के माध्यम से शरीर की ऊर्जा को मूलाधार चक्र से सहस्रार चक्र तक पहुंचाना होता है। दुर्गा सप्तशती में देवी कवच का उद्देश्य भी शरीर के सभी अंगों पर ध्यान केंद्रित करना है, क्योंकि हर अंग का संबंध किसी न किसी देवी से होता है।
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शारदीय नवरात्रि 2024
- फोटो : adobe stock
पहाड़ों पर माता का वास
ऋषि-मुनियों ने नवरात्रि के दौरान पहाड़ों पर देवी के दर्शन का विधान इसलिए बनाया, ताकि पहाड़ों पर चढ़ाई और उतराई से शरीर का व्यायाम हो सके। इससे पुराने मौसम के दोष पसीने के जरिए बाहर निकल जाते थे और व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती थी, जिससे वह आने वाले मौसम में स्वस्थ रह सके।
ऋषि-मुनियों ने नवरात्रि के दौरान पहाड़ों पर देवी के दर्शन का विधान इसलिए बनाया, ताकि पहाड़ों पर चढ़ाई और उतराई से शरीर का व्यायाम हो सके। इससे पुराने मौसम के दोष पसीने के जरिए बाहर निकल जाते थे और व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती थी, जिससे वह आने वाले मौसम में स्वस्थ रह सके।
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शारदीय नवरात्रि 2024
- फोटो : freepik
कन्या पूजन का महत्व
नवरात्रि के दौरान कन्याओं को भोजन कराना इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि साधक सभी विकारों से मुक्त होकर उन कन्याओं को भोजन कराते हैं, जिन्होंने कभी काम, क्रोध, लोभ, और अहंकार का अनुभव नहीं किया होता। ये कन्याएं नौ वर्ष तक की होती हैं, और उनके शुद्ध और निर्दोष स्वभाव को सम्मान देने के लिए उन्हें भोजन कराया जाता है।
नवरात्रि के दौरान कन्याओं को भोजन कराना इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि साधक सभी विकारों से मुक्त होकर उन कन्याओं को भोजन कराते हैं, जिन्होंने कभी काम, क्रोध, लोभ, और अहंकार का अनुभव नहीं किया होता। ये कन्याएं नौ वर्ष तक की होती हैं, और उनके शुद्ध और निर्दोष स्वभाव को सम्मान देने के लिए उन्हें भोजन कराया जाता है।