मां सभी रूपों में प्रत्यक्ष है और सभी नाम ग्रहण करती है। माँ दुर्गा के नौ रूप है और हर रूप में एक दैवीय शक्ति है। इन नौ रूपों की पूजा-अर्चना करना ही नवरात्रि मनाना है। बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक पर्व दशहरा मनाने के साथ ही असीम आनन्द और हर्षोल्लास के साथ नवरात्रि पर्व का समापन होता है।
Navratri 2019: नवरात्रि के 9 दिन और 9 देवियां
शैलपुत्री
नवरात्रि के नौ दिनों में माँ दुर्गा के स्वरूपों का सम्मान किया जाता है और पूजा-अर्चना की जाती है। माँ दुर्गा का पहला स्वरुप शैलपुत्री है। शैल का मतलब होता है शिखर। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार देवी शैलपुत्री कैलाश पर्वत की पुत्री है इसलिए देवी शैलपुत्री को पर्वत की बेटी भी कहा जाता है। मां के इस रूप का वास्तविक अर्थ है- चेतना का सर्वोच्चतम स्थान।
ब्रह्मचारिणी
ब्रह्मचारिणी का अर्थ है वह जो असीम, अनन्त में विद्यमान, गतिमान है। एक ऊर्जा है जो अनन्त में विचरण करती है। देवी माँ असीमित, अनन्त हैं इनकी कोई सीमाएं नहीं है। ब्रह्मचारिणी सर्वव्यापक चेतना है। जिसका कोई आदि या अंत न हो, वह सर्वव्याप्त, सर्वश्रेष्ठ है और उसके पार कुछ भी नहीं।
चन्द्रघंटा
मां के यह दैवीय रूप दुःख, विपत्ति, भूख और यहाँ तक कि शांति में भी मौजूद है। इस रूप का अर्थ यही है कि सबको साथ लेकर चलना चाहिए, चाहे परिस्थितियां कैसी भी हो। नाम के प्रथम में जो चंद्र लगता है उसका तात्पर्य ही हमारे मन का प्रतीक है।
कूष्माण्डा
मां के इस स्वरुप का अर्थ प्राणशक्ति से है। वह प्राणशक्ति जो पूर्ण एक गोलाकार वृत्त की तरह है। इसका अर्थ यह भी है, कि देवी मां सदैव हमारे अंदर प्राणशक्ति के रूप में प्रकट रहती हैं। ऊर्जा या चेतना में सूक्ष्म से सूक्ष्मतम होने की और विशाल से विशालतम होने का गुण होता है।सर्वव्यापी, जागृत, प्रत्यक्ष बुद्धिमत्ता का सृष्टि में अनुभव ही कूष्माण्डा है।