नागपंचमी का पर्व हर वर्ष सावन मास की शुक्लपक्ष की पंचमी के दिन मनाया जाता है। नागपंचमी के दिन नागों की पूजा करने का विधान है। पुराने समय से ही हमारे देश में नागों की पूजा की जाती है, शास्त्रों में नागों को पाताल का स्वामी बताया गया है। भगवान शिव को नागों का देवता माना जाता हैं, वे अपने गले में वासुकी नाग धारण करते हैं,
नाग पंचमी 2020: बन रहा है दुर्लभ योग कालसर्प दोष निवारण के लिए है सर्वोत्तम
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नाग पंचमी के दिन उत्तरा फाल्गुनी और हस्त नक्षत्र के प्रथम चरण में दुर्लभ योग बन रहा है। शास्त्रो में इस योग में कालसर्प योग की शांति करवाने का विधान बताया गया है। ज्योतिषियों के अनुसार इस दिन परिगणित और शिव नामक योग भी बन रहा है। जिसकी वजह से भी इस बार नागपंचमी का दिन बहुत शुभ है। नागपंचमी के दिन पूजन करने से नागों की कृपा के साथ शनि, राहु आदि ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव से भी मुक्ति मिलती है।
नाग भगवान महादेव को अपना आराध्य मानते हैं और उनका सेवा करते हैं। नागपंचमी के दिन नागों की पूजा के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा भी करनी चाहिए। इस दिन भगवान शिव का रूद्र के मंत्रो से अभिषेक करें और उसके बाद मिट्टी के नाग-नागिन बनाकर उनकी दूध, धान, धान का लावा, दूर्वा, अक्षत, पान आदि से पूजा करें। इससे नागदेवता के साथ महादेव की कृपा भी प्राप्त होती है। बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
कब से कब तक रहेगी पंचमी तिथि
24 जुलाई शायं 4:10 मिनट से आरंभ होकर 25 जुलाई को दोपहर 1:55 मिनट तक पंचमी तिथि रहेगी।
क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त
सुबह 07:03 मिनट से 09:17 मिनट तक और 11:29 बजे से 12:30 मिनट तक पूजा करने के लिए समय उत्तम रहेगा।