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Nag Panchami 2019: जब कालिया नाग ने पूरी यमुना नदी में फैला दिया था विष

Sun, 04 Aug 2019 11:46 AM IST
प्रशांत राय धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रशांत राय Updated Sun, 04 Aug 2019 11:46 AM IST
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Nag Panchami 2019 mythological story of nag panchami

हिन्दू धर्म की पुरानी मान्यताओं के बीच सांप को सामान्य जीव नहीं बल्कि चमत्कारिक दैवीय जीव माना गया है। पुराने समय से सांप को देवता के तौर पर पूजा जाता है। सांपों के लिए हिन्दू धर्म में खास त्योहार नाग पंचमी मनाया जाता है। शेषनाग पर लेटे भगवान विष्णु हों या फिर कंठ में सर्परूपी माला धारण करने वाले भगवान शिव। माता पार्वती के कई मंदिरों में नागों की विशेष पूजा की जाती है। नांग पंचमी मनाए जाने के बीच कई धार्मिक मान्यताएं हैं। आइए जानते हैं उन काहिनयों के बारे में जो लोक कथाओं में प्रचलित हैं। 



इस नागपंचमी पर प्रसिद्ध त्र्यम्बकेश्वर मंदिर, उज्जैन में कराएं कालसर्प दोष शान्ति पूजा। (विज्ञापन)

Nag Panchami 2019 mythological story of nag panchami

सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचम तिथि को नाग पंचमी मनाई जाएगी। इस बार 5 अगस्त को नाग पंचमी मनाई जाएगी। इसके अलावा देश के कई हिस्सों में सावन के कृष्ण पक्ष की पंचमी को भी नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। हिन्दू पुराणों के अनुसार नागों को पाताल लोक या फिर नाग लोक का स्वामी माना जाता है। नागपंचमी के खास मौके पर मनसा देवी की विशेष पूजा की जाती है। दक्षिण भारत में हिमालय श्रृंखला के शिवालिक पर्वत पर मनसा देवी का बड़ा सा मंदिर मौजूद है। 

इस नागपंचमी पर प्रसिद्ध त्र्यम्बकेश्वर मंदिर, उज्जैन में कराएं कालसर्प दोष शान्ति पूजा। (विज्ञापन)

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ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव के अंश से ही मनसा देवी की उत्पत्ति हुई थी। उन्हें नाग समुदाय की माता वासुकि की भी बहन माना जाता है। नागपंचमी के दिन सांपों को दूध और लावा अर्पित करके लोग मनचाही वरदान मांगते हैं। भारत के अलावा नेपाल में भी यह त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। कुछ जगहों पर चतुर्थी के दिन भी सांपों की पूजा-अर्चना की जाती है। 

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पुराणों के मुताबिक एक बार कालिया नाग ने पूरी यमुना नदी को अपने विष से जहरीला बना दिया था। बृजवासियों के लिए नदी का पानी जहर बन चुका था। फिर भगवान विष्णु के अवतार भगवान कृष्ण ने बृजवासियों की समस्या को हल करने के लिए एक चाल चली। एक दिन वह गेंद ढूंढने के बहाने यमुना में कूद गए और कालिया नाग को युद्ध में पछाड़ दिया। 

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युद्ध में हार होने के बाद कालिया नाग ने नदी में घुले अपने पूरे विष को वापस ले लिया। उस दिन सावन की पंचम तिथि थी। इसके बदले में भगवान कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि जो भी पंचमी के दिन सर्प देवता को दूध पिलाएगा तो उसके जीवन के सारे दुख-दर्द दूर हो जाएंगे। उसी दिन से नाग पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। 

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