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Mohini Ekadashi 2022: कब है मोहिनी एकादशी ? भगवान विष्णु ने क्यों लिया मोहिनी का अवतार, जानें पौराणिक कथा

Thu, 05 May 2022 09:53 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 05 May 2022 09:53 AM IST
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Mohini Ekadashi 2022 Know Why Bhagwan Vishnu Get Mohini Avatar Significance
Ekadashi Vrat 2022 - फोटो : अमर उजाला

हिंदू पंचांग के अनुसार हर एक माह में दो एकादशियों का व्रत, पूजन और अनुष्ठान कार्य किया जाता है। माह के शुक्ल और कृष्ण पक्ष में एकादशी का व्रत रखा जाता है। हिंदू धर्म में एकादशी के व्रत को बहुत ही श्रेष्ठ और शुभ फलदायी माना गया है। एकादशी के व्रत को रखने से माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा पाने के साथ पुण्य की प्राप्ति होती है। वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मोहिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार इस बार मोहिनी एकादशी 12 मई, गुरुवार को है। गुरुवार के दिन इस एकादशी पड़ने के कारण इसका महत्व काफी बढ़ जाता है, क्योंकि गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु के अवतार प्रभु श्रीराम और विष्णुजी के मोहिनी स्वरूप का पूजन-अर्चन किया जाता है।



मोहिनी एकादशी का शुभ मुहूर्त 
मोहिनी एकादशी तिथि का आरंभ: 11 मई 2022, शाम 7:31 से
मोहिनी एकादशी तिथि का समापन: 12 मई 2022,शाम 6:51 बजे तक

Mohini Ekadashi 2022 Know Why Bhagwan Vishnu Get Mohini Avatar Significance
मोहिनी एकादशी व्रत

जब भगवान विष्णु ने रखा मोहिनी रूप 
पौराणिक मान्यता के अनुसार मोहिनी,भगवान विष्णु का अवतार रूप थीं। समुद्र मंथन के समय जब समुद्र से अमृत कलश निकला,तो इस बात को लेकर विवाद हुआ कि राक्षसों और देवताओं के बीच अमृत का कलश कौन लेगा। सभी देवताओं ने भगवान विष्णु से सहायता मांगी। अमृत के कलश से राक्षसों का ध्यान भटकाने के लिए मोहिनी नामक एक सुंदर स्त्री के रूप में विष्णु भगवान प्रकट हुए। इस प्रकार,सभी देवताओं ने भगवान विष्णु की सहायता से अमृत का सेवन किया। यह शुभ दिन वैशाख शुक्ल  एकादशी का था,इसीलिए इस दिन को मोहिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। 

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एकादशी - फोटो : अमर उजाला

एकादशी व्रत कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार,सरस्वती नदी के पास भद्रावती नाम का एक सुन्दर नगर था। राजा धृतिमान जो भगवान विष्णु के परम भक्त थे, इस स्थान पर शासन करते थे। उनके पाँच पुत्र थे, जिनमें से पाँचवाँ पुत्र जिसका नाम धृष्टबुद्धि था, बहुत बुरे कामों और अनैतिक कार्यों में शामिल होने वाला पापी था।यह सब देखकर, राजा धृष्टिमन ने धृष्टबुद्धि का त्याग कर दिया। जीवित रहने के लिए, वह डकैती के कृत्यों में शामिल हो गया। परिणामस्वरूप, उसे राज्य से बाहर निकाल दिया गया। धृष्टबुद्धी एक जंगल में रहने लगा। एक बार जब वह जंगल में भटक रहा था, तो वह ऋषि कौंडिन्य के आश्रम में पहुंचा। यह वैशाख मास का समय था और ऋषि कौंडिन्य स्नान कर रहे थे। कुछ बूंदें निकल गयीं और धृष्टबुद्धि पर पड़ गयीं। इस वजह से धृष्टबुद्धि ने आत्म-साक्षात्कार और अच्छी भावना को प्राप्त किया और इस तरह उसने अपने सभी अनैतिक कार्यों पर पछतावा किया। उसने ऋषि से अपने पिछले पापों और बुरे कर्मों से मुक्ति के मार्ग की तरफ जाने के लिए मार्गदर्शन करने का अनुरोध किया। इसके लिए, ऋषि ने उसे  मोहिनी एकादशी व्रत का पालन करने के लिए कहा, ताकि उसे पापों से छुटकारा मिल सके। एकादशी के दिन, धृष्टबुद्धि ने पूरी श्रद्धा के साथ एकादशी व्रत रखा। व्रत के प्रभाव से  उसके सभी पाप धुल गए और वह विष्णु लोक में पहुंच गया।

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एकादशी 2022 - फोटो : अमर उजाला
मोहिनी एकादशी का महत्व और पूजा विधि
मान्यता है कि एकादशी व्रत रखने से व्यक्ति के सभी तरह के कष्ट और पाप दूर हो जाते हैं। एकादशी सब पापों को हरने वाली उत्तम तिथि है। इससे बढ़कर दूसरी कोई तिथि नहीं है। इस दिन समस्त कामनाओं तथा सिद्धियों के दाता भगवान श्री नारायण की उपासना करनी चाहिए। रोली,मोली,पीले चन्दन,अक्षत,पीले पुष्प,ऋतुफल,मिष्ठान आदि अर्पित कर धूप-दीप से श्री हरि की आरती उतारकर दीप दान करना चाहिए। इस दिन 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय 'का जप एवं विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना बहुत फलदायी है। 
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