इस बार मौनी अमावस्या 18 जनवरी 2026 को पड़ रही है। यह माघ मास की अमावस्या के दिन मनाई जाती है। इस दिन लोग सूर्योदय से सूर्यास्त तक मौन व्रत रखते हैं, ध्यान, साधना और दान करते हैं। पुराणों और ज्योतिष के अनुसार, मौन व्रत से मानसिक शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा और जीवन में स्थिरता आती है। इसे करने से धन, स्वास्थ्य और ज्ञान के विशेष योग बनते हैं।
{"_id":"69690d2f941d444f4e0a7012","slug":"mauni-amavasya-2026-know-date-and-what-is-importance-and-labh-of-maun-vrat-in-hindi-2026-01-15","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Mauni Amavasya 2026: 18 जनवरी की मौनी अमावस्या, क्यों रखना चाहिए मौन व्रत और क्या हैं इसके लाभ?","category":{"title":"Religion","title_hn":"धर्म","slug":"religion"}}
Mauni Amavasya 2026: 18 जनवरी की मौनी अमावस्या, क्यों रखना चाहिए मौन व्रत और क्या हैं इसके लाभ?
Fri, 16 Jan 2026 12:36 PM IST
श्वेता सिंह
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: श्वेता सिंह
Updated Fri, 16 Jan 2026 12:36 PM IST
सार
Mauni Amavasya 2026
- 18 जनवरी, रात 12:03 बजे से 19 जनवरी रात 1:21 बजे तक।
- मौन व्रत रखने से मानसिक और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
- दान, सेवा और साधना से जीवन में सुख, शांति और धन की प्राप्ति होती है।
- दिन भर मौन रहकर ध्यान और प्रार्थना करना अत्यंत शुभ।
- व्रत जीवन में स्थिरता, निर्णय शक्ति और मानसिक संतुलन बढ़ाता है।
विज्ञापन
मौनी अमावस्या 2026 शुभ योग
- फोटो : amar ujala
मौनी अमावस्या कब है?
- फोटो : अमर उजाला।
मौनी अमावस्या कब है?
- मौनी अमावस्या 2026 की शुरुआत 18 जनवरी रात 12:03 बजे होगी और यह अगले दिन 19 जनवरी रात 1:21 बजे तक रहेगी। यह अवधि व्रत, ध्यान और साधना के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है।
- इस दिन लोग पूरे दिन मौन रहते हैं, अनावश्यक बातों से बचते हैं और अपने चित्त को ध्यान और प्रार्थना में केंद्रित करते हैं।
- उपवास, दान और सेवा इस दिन विशेष रूप से शुभ मानी जाती हैं, जो व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव और मानसिक संतुलन लाते हैं।
मौनी अमावस्या पर क्यों रखा जाता है मौन व्रत?
- फोटो : अमर उजाला।
मौनी अमावस्या पर क्यों रखा जाता है मौन व्रत?
- मौन रहकर व्यक्ति अपने मन और चित्त को शुद्ध करता है, जिससे सकारात्मक सोच और आत्म-नियंत्रण बढ़ता है।
- यह व्रत धैर्य, मानसिक शक्ति और निर्णय क्षमता को मजबूत करने में सहायक होता है।
- साथ ही, दान, सेवा और साधना करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक सिद्धि और जीवन में स्थायी खुशहाली मिलती है।
- तनाव और असंतुलन कम होकर जीवन में स्थिरता आती है, जिससे मन और शरीर दोनों स्वस्थ और संतुलित रहते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस दिन सूर्य और चंद्रमा की स्थिति साधना, ध्यान और मौन व्रत के लिए विशेष रूप से शुभ मानी जाती है।
- फोटो : राजू सैनी
क्या है ज्योतिषीय दृष्टिकोण?
- ज्योतिषीय दृष्टि से, माघ माह की अमावस्या में चंद्रमा अंधकार में होता है, जो नई शुरुआत और मानसिक उन्नति के लिए अनुकूल मानी जाती है।
- इस दिन सूर्य और चंद्रमा की स्थिति साधना, ध्यान और मौन व्रत के लिए विशेष रूप से शुभ मानी जाती है।
- पुराणों में बताया गया है कि मौन व्रत और दान से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और सफलता की प्राप्ति होती है।
विज्ञापन
आध्यात्मिक जागरूकता और ऊर्जा में वृद्धि होगी, जो व्यक्ति को आत्मनियंत्रण और मानसिक दृढ़ता प्रदान करती है।
- फोटो : राजू सैनी
मौन व्रत रखने के लाभ
- मानसिक शांति और संतुलन में वृद्धि होगी, जिससे व्यक्ति तनाव और उलझनों से मुक्त रहेगा।
- जीवन में स्थायी सफलता और सुख की प्राप्ति होगी, क्योंकि मौन व्रत कर्तव्यों और संकल्पों में जागरूकता लाता है।
- आध्यात्मिक जागरूकता और ऊर्जा में वृद्धि होगी, जो व्यक्ति को आत्मनियंत्रण और मानसिक दृढ़ता प्रदान करती है।
- संकल्प और साधना से लंबे समय तक जीवन में दिशा, स्थिरता और संतुलन बना रहेगा।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।