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Mauni Amavasya 2025: जानें मौनी अमावस्या पर मौन व्रत का समय, नियम और महत्व
Tue, 28 Jan 2025 04:52 PM IST
ज्योति मेहरा
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति मेहरा
Updated Tue, 28 Jan 2025 04:52 PM IST
सार
मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत धारण करने का विशेष महत्व है। ऐसे में आइए जानते हैं मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत रखने की विधि और इसका महत्व क्या है।
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Mauni Amavasya 2025
- फोटो : Amar Ujala
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Maun Vrat Timing On Mauni Amavasya 2025: मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत धारण करने का विशेष महत्व है। इस दिन कई श्रद्धालु मौन रहकर अपनी भक्ति को और अधिक प्रबल बनाते हैं। यह सवाल अक्सर उठता है कि मौनी अमावस्या पर मौन व्रत कितनी देर तक रखा जाना चाहिए और इसे कैसे किया जाए। ध्यान देने योग्य बात यह है कि श्रद्धालु अपनी आस्था और सामर्थ्य के अनुसार, कुछ समय से लेकर पूरे दिन तक मौन व्रत रख सकते हैं। हालांकि, कम से कम स्नान के दौरान मौन रहना आवश्यक माना गया है। ऐसे में आइए जानते हैं मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत रखने की विधि और इसका महत्व क्या है।
मौनी अमावस्या पर मौन व्रत का समय
- फोटो : adobe stock
मौनी अमावस्या पर मौन व्रत का समय
मौन व्रत स्नान के समय से प्रारंभ किया जा सकता है। यदि कोई विशेष मनोकामना हो, तो पूरे दिन मौन व्रत धारण करना भी शुभ माना जाता है। पूरे दिन मौन व्रत रखने वाले सूर्योदय से सूर्यास्त तक मौन रहें और व्रत का समापन शाम को भगवान विष्णु या शिव की पूजा और आरती के साथ करें।
मौन व्रत स्नान के समय से प्रारंभ किया जा सकता है। यदि कोई विशेष मनोकामना हो, तो पूरे दिन मौन व्रत धारण करना भी शुभ माना जाता है। पूरे दिन मौन व्रत रखने वाले सूर्योदय से सूर्यास्त तक मौन रहें और व्रत का समापन शाम को भगवान विष्णु या शिव की पूजा और आरती के साथ करें।
मौन व्रत रखने की विधि
- फोटो : adobe stock
मौन व्रत रखने की विधि
- स्नान के दौरान मौन रहना: स्नान करते समय मौन रहें और मन में भगवान का ध्यान करें।
- संकल्प लें: यदि आप पूरे दिन मौन व्रत रखना चाहते हैं, तो सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मौन रहने का संकल्प लें।
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मौन व्रत रखने की विधि
- फोटो : Freepik.com
- संवाद से बचें: बातचीत से बचें। यदि आवश्यक हो, तो संकेतों या लिखित रूप से अपनी बात समझाएं।
- तामसिक भोजन से परहेज: इस दिन तामसिक भोजन और नकारात्मक विचारों से बचें।
- ध्यान और जप: मौन व्रत के दौरान ध्यान, योग, और भगवान के मंत्रों का जाप करें।
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मौन व्रत के लाभ
- फोटो : अमर उजाला / एजेंसी
मौन व्रत के लाभ
मौनी अमावस्या पर मौन व्रत रखने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। इसे धारण करने से बाहरी और आंतरिक शुद्धि होती है। मौन व्रत मानसिक शांति प्रदान करता है और मन को नियंत्रित करता है। इसके अलावा, यह आत्म-संयम और ध्यान केंद्रित करने की शक्ति को बढ़ाता है। भगवद गीता में भी इस बात का उल्लेख है कि जिनका मन अशांत रहता है, उन्हें मौन व्रत अवश्य करना चाहिए।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
मौनी अमावस्या पर मौन व्रत रखने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। इसे धारण करने से बाहरी और आंतरिक शुद्धि होती है। मौन व्रत मानसिक शांति प्रदान करता है और मन को नियंत्रित करता है। इसके अलावा, यह आत्म-संयम और ध्यान केंद्रित करने की शक्ति को बढ़ाता है। भगवद गीता में भी इस बात का उल्लेख है कि जिनका मन अशांत रहता है, उन्हें मौन व्रत अवश्य करना चाहिए।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।