फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Mahavir Jayanti 2024: भगवान महावीर को इस तरह प्राप्त हुआ 'कैवल्य ज्ञान', संसार को दिया ये संदेश

Thu, 11 Apr 2024 11:06 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति मेहरा Updated Thu, 11 Apr 2024 11:06 PM IST
विज्ञापन
Mahavir Jayanti 2024 Motivational Story Of Mahavir Swami the Founder of Jainism
Mahavir Jayanti 2024 - फोटो : amar ujala

Mahavir Jayanti Day 2024: जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर व अंतिम, सत्य और अहिंसा के अग्रदूत भगवान महावीर के अनुयायी दुनियाभर में हैं। भगवान महावीर का जन्म लगभग 2600 वर्ष पूर्व राजा सिद्धार्थ व महारानी त्रिशला के यहां चैत्र शुक्ल त्रयोदशी के पावन दिन हुआ था। इसलिए हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को महावीर जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 21 अप्रैल को मनाया जाएगा। मान्यता है कि भगवान महावीर करीब 599 ईसा पूर्व बिहार के कुंडलपुर के राजघराने में पैदा हुए थे।



इनका जन्म होते ही राजा सिद्धार्थ के राज्य, मान-प्रतिष्ठा, धन-धान्य में वृद्धि होने लगी थी। इसलिए इनका नाम वर्धमान रखा गया। वर्धमान बचपन से ही बड़े साहसी व निर्भीक थे। इनके पराक्रम के कारण आगे चलकर वे महावीर के नाम से प्रसिद्ध हुए।

Mahavir Jayanti 2024 Motivational Story Of Mahavir Swami the Founder of Jainism
Mahavir Jayanti Wishes in Hindi - फोटो : अमर उजाला

तीर्थंकर से क्या है तात्पर्य?
जैन धर्म में तीर्थंकर उन 24 दिव्य महापुरुषों को कहा गया है, जिन्होंने अपनी तपस्या से आत्मज्ञान की प्राप्ति की और अपनी इंद्रियों और भावनाओं पर पूरी तरह से विजय प्राप्त कर लिया था। भगवान महावीर ने दिगंबर स्वीकार कर लिया था, इसलिए वह कोई वस्त्र धारण नहीं करते थे। दरअसल, दिगंबर मुनि आकाश को ही अपना वस्त्र मानते हैं।

Mahavir Jayanti 2024 Motivational Story Of Mahavir Swami the Founder of Jainism
हैप्पी महावीर जयंती - फोटो : अमर उजाला

जियो और जीने दो का संदेश
भगवान महावीर शुरू के 30 वर्षों तक राजसी वैभव और विलास के दलदल में कमल के समान रहे। इसके बाद वह 12 वर्ष घनघोर जंगल में मंगल साधना और आत्म जागृति की आराधना में इतने लीन हो गए कि इस दौरान उनके शरीर के कपड़े भी गिरकर अलग होते गए। 12 वर्ष की मौन तपस्या के बाद भगवान महावीर को 'कैवल्य ज्ञान' प्राप्त हुआ। यह मोक्ष या समाधि की एक अवस्था होती है। इसे मोक्ष कहा जाता है। इसी मोक्ष को जैन धर्म में कैवल्य ज्ञान और बौद्ध धर्म में संबोधी एवं निर्वाण कहा गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Mahavir Jayanti 2024 Motivational Story Of Mahavir Swami the Founder of Jainism
हैप्पी महावीर जयंती - फोटो : अमर उजाला

कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति के बाद महावीर जी ने 30 वर्षों तक जनकल्याण हेतु चार तीर्थों साधु -साध्वी, श्रावक-श्राविका की रचना में लगे रहे। खास बात ये है कि इन सर्वोदय तीर्थों में क्षेत्र, काल, समय या जाति की कोई सीमाएं नहीं थीं। भगवान महावीर का आत्म धर्म पूरे जगत की हर एक आत्मा के लिए समान था। वह कहते थे कि हमें दूसरों के प्रति भी वही व्यवहार व विचार रखना चाहिए जो हमें स्वयं के लिए पसंद हो।

विज्ञापन
Mahavir Jayanti 2024 Motivational Story Of Mahavir Swami the Founder of Jainism
हैप्पी महावीर जयंती 2024 - फोटो : अमर उजाला

यही भगवान महावीर का 'जियो और जीने दो' का सिद्धांत है। उन्होंने लोगों को न केवल मुक्ति का संदेश दिया, बल्कि मुक्ति की सरल और सही राह भी दिखाई। उन्होंने आत्मिक और शाश्वत सुख की प्राप्ति के लिए सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, अचौर्य और ब्रह्मचर्य जैसे पांच मूलभूत सिद्धांतों के बारे में भी बताया। इन सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारकर महावीर 'जिन' कहलाए। जिन शब्द से ही 'जैन' बना है, जिसका अर्थ है जो काम, तृष्णा, इन्द्रिय व भेद जयी है वह जैन है।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed