Magh Gupt Navratri: सनातन धर्म में नवरात्रि को सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है। नवरात्रि का साल में चार बार आती है। जिसमें से दो गुप्त और दो और प्रत्यक्ष नवरात्रि होती है। प्रत्यक्ष नवरात्रि में जहां मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना की जाती है। गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की पूजा की जाती है। किसी विशेष मनोरथ सिद्धि हेतु ये नवरात्र बहुत खास माने जाते हैं। इस दौरान जिन 10 महाविद्याओं की पूजा की जाती है वह कुछ इस प्रकार हैं- मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी।
Magh Gupt Navratri: गुप्त नवरात्रि और प्रत्यक्ष नवरात्रि में क्या है अंतर? जानें शुभ मुहूर्त और महत्व
Gupt Navratri Kyon Manayi Jati Hai: गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की पूजा की जाती है। किसी विशेष मनोरथ सिद्धि हेतु ये नवरात्रि बहुत विशेष मानी जाती है। इस दौरान जिन 10 महाविद्याओं की पूजा की जाती है वह कुछ इस प्रकार हैं- मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी।
माघ के गुप्त नवरात्रि तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 29 जनवरी 2025 को शाम 6 बजकर 5 मिनट पर होगी। जिसका समापन 30 जनवरी 2025 को शाम 4 बजकर 10 मिनट पर समाप्त होगी। जिसके हिसाब से गुप्त नवरात्रि की शुरुआत गुरुवार 30 जनवरी को होगी। वहीं गुप्त नवरात्रि का समापन शुक्रवार 7 फरवरी 2025 को होगा।
माघ के गुप्त नवरात्रि स्थापना शुभ मुहूर्त
गुप्त नवरात्रि की पूजा की शुरुआत घट स्थापना के साथ की जाती है। पंचांग के अनुसार, गुप्त नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना का शुभ मुहूर्त की शुरुआत 30 जनवरी सुबह 9 बजकर 25 मिनट से लेकर 10 बजकर 46 मिनट तक है। ऐसे में भक्तों को घटस्थापना के लिए कुल 1 घंटे 21 मिनट का समय मिलेगा। इसके अलावा घट स्थापना का अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से लेकर 12 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। यहां भक्तों को 43 मिनट का समय मिलेगा।
गुप्त नवरात्रि का महत्व
गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की 10 महाविद्या प्रकट हुईं थी। माघ गुप्त नवरात्रि के दौरान देवी शक्ति के अलग-अलग नामों का जाप, देवी के मंत्रों का जाप, दुर्गा सप्तशती , देवी महात्म्य और श्रीमद्-देवी भागवत जैसे धार्मिक ग्रंथों का पाठ करने से सभी परेशानियां दूर होती है और जीवन में सुख शांति आती है। मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में गई साधना जन्मकुंडली के समस्त दोषों को दूर करने वाली और धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष देने वाली होती। इन पवित्र नवरात्रों में जो साधक देवी शक्ति की उपासना किसी विशेष मनोरथ सिद्धि हेतु पवित्रता व श्रद्धा भाव से करते हैं तो उनके मनोरथ सिद्ध होते हैं।
प्रत्यक्ष नवरात्रि से क्यों अलग है गुप्त नवरात्रि?
चैत्र व शारदीय नवरात्रों को प्रत्यक्ष और आषाढ़ और माघ माह में पड़ने वाली नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि के नाम से जाना जाता है। प्रत्यक्ष नवरात्रि में नव दुर्गा की पूजा संपन्न की जाती है तो गुप्त नवरात्रि में देवी दुर्गा की 10 महाविद्याओं की पूजा की जाती है।
प्रत्यक्ष नवरात्रि में सात्विक साधना, नृत्य व उत्सव मनाए जाते हैं जबकि इसके विपरीत गुप्त नवरात्रि में तांत्रिक साधना और कठिन व्रत का महत्व होता है। कहा जाता है कि प्रत्यक्ष नवरात्रि के दौरान संसार इच्छाओं की पूर्ति के लिए पूजा अर्चना की जाती है। परंतु गुप्त नवरात्रि को आध्यात्मिक इच्छाओं की पूर्ति, सिद्धि व मोक्ष हेतु पूजा संपन्न की जाती है।
प्रत्यक्ष नवरात्रि वैष्णवों की कहलाती हैं तथा गुप्त नवरात्रि शैव व शाक्तों की मानी जाती है। जहां प्रत्यक्ष नवरात्रि की प्रमुख देवी मां पार्वती को माना जाता है तो वही गुप्त नवरात्रि की प्रमुख देवी मां काली को माना जाता है।
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