Krishna Janmashtami 2023 Vrat Paran Time: प्रत्येक वर्ष की तरह इस साल भी देशभर में जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लिया था। इसी उपक्ष्य में यह पर्व मनाया मनाया जाता है। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन घरों और मंदिरों में विशेष रूप से सजावट की जाती है। देशभर के सभी प्रसिद्ध कृष्ण मंदिरों में विशेष तरह के आयोजन किए जाते हैं। भगवान कृष्ण का जन्म मध्य रात्रि में हुआ था। ऐसे में कृष्ण भक्त इस दिन उपवास रखकर कान्हा की भक्ति में डूबे रहते हैं और रात में 12 बजे श्री कृष्ण के जन्म के बाद विधि पूर्वक पूजा करते हैं और व्रत का पारण करते हैं।
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Janmashtami Vrat Paran Time: शुभ मुहूर्त में ही करें जन्माष्टमी व्रत का पारण, जानें उपवास खोलने की सही विधि
Thu, 07 Sep 2023 06:59 AM IST
आशिकी पटेल
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आशिकी पटेल
Updated Thu, 07 Sep 2023 06:59 AM IST
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शुभ मुहूर्त में ही करें जन्माष्टमी व्रत का पारण, जानें उपवास खोलने की सही विधि
- फोटो : iStock
शुभ मुहूर्त में ही करें जन्माष्टमी व्रत का पारण, जानें उपवास खोलने की सही विधि
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हिंदू धर्म में सिर्फ व्रत ही नहीं बल्कि उसके पारण का भी विषेश महत्व होता है। कोई भी व्रत तभी पूर्ण माना जाता है, जब उसका पारण विधिपूर्वक किया जाए। अगर पारण के नियमों को पालन न किया जाए, तो व्रत का पूरा फल नहीं मिलता है। ऐसे में यदि आपने भी जन्माष्टमी का व्रत रखा है तो इसका पारण भी विधि पूर्वक करें। चलिए जानते हैं जन्माष्टमी व्रत के पारण का नियम और सही समय...
शुभ मुहूर्त में ही करें जन्माष्टमी व्रत का पारण, जानें उपवास खोलने की सही विधि
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जन्माष्टमी व्रत पारण का समय 2023
जन्माष्टमी व्रत पारण आप तीन तरह से कर सकते हैं। कुछ लोग रात में ही कन्हा की पूजा के बाद व्रत का पारण कर लेते हैं, तो कुछ लोग अगले दिन सुबह व्रत का पारण करते हैं। वहीं कुछ लोग अष्टमी तिथि के समाप्त होने के बाद इस व्रत का पारण करते हैं। आप अपनी सुविधा के अनुसार कभी भी इस व्रत का पारण कर सकते हैं।
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शुभ मुहूर्त में ही करें जन्माष्टमी व्रत का पारण, जानें उपवास खोलने की सही विधि
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- रात में व्रत पारण का समय- 12 बजकर 42 मिनट के बाद
- अगले दिन सुबह व्रत पारण का समय- 7 सितंबर को सुबह 06 बजकर 02 मिनट के बाद
- अष्टमी तिथि के समापन के बाद व्रत पारण का समय- 7 सितंबर को शाम 04 बजकर 14 मिनट के बाद
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इस तरह करें व्रत का पारण
इस दिन कान्हा को भोग लगाने के लिए जो पंजीरी और माखन चढ़ाई जाती है, उसी से व्रत का पारण करें। मान्यता है कि अगर कान्हा के भोग के प्रसाद से ही व्रत का पारण किया जाए, तो ही कान्हा की पूजा पूर्ण मानी जाती है।
इस दिन कान्हा को भोग लगाने के लिए जो पंजीरी और माखन चढ़ाई जाती है, उसी से व्रत का पारण करें। मान्यता है कि अगर कान्हा के भोग के प्रसाद से ही व्रत का पारण किया जाए, तो ही कान्हा की पूजा पूर्ण मानी जाती है।