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Krishna Janmashtami 2019: जब आखिरी बार कृष्ण ने बजाई बांसुरी, जानें क्यों तोड़ कर फेंक दी

Sat, 17 Aug 2019 02:00 PM IST
प्रशांत राय धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत राय Updated Sat, 17 Aug 2019 02:00 PM IST
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Krishna Janmashtami 2019: story of lord krishna and radha
- फोटो : social media

बात जब भी प्रेम की होती है और मिसाले दी जाती हैं तो राधा और कृष्ण के प्रेम की मिसाल दी जाती है। दुनियाभर में लोग राधा-कृष्ण की पूजा करते हैं। हालांकि कृष्ण का विवाह रूकमनी के साथ हुआ लेकिन कृष्ण के साथ हमेशा राधा का नाम ही जुड़ता है। इसके बाद भी दोनों कभी मिल नहीं पाएं और उनकी प्रेम कहानी अंजाम तक नहीं पहुंच पाई। इसलिए हम आपको बताने जा रहे हैं कृष्ण की शादी के बाद राधा के जीवन में किस तरह का बदलाव आया और किन कारणों से भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बांसुरी तोड़ दी। 

Krishna Janmashtami 2019: story of lord krishna and radha
भगवान कृष्ण - फोटो : Social media

राधा और कृष्ण जब आठ साल के थे तभी से उनको अपने प्रेम का आभास हो गया था। राधा का कृष्ण के प्रति प्रेम इतना अटूट था कि उन्होंने पूरी जिंदगी कृष्ण को अपने मन में बसाए रखा। राधा-कृष्ण कभी एक ना होते हुए भी सदैव एक ही रहे, तभी राधा और कृष्ण की कभी शादी नहीं हुई लेकिन आज के समय में भी राधा और कृष्ण का नाम एक साथ लिया जाता है। कृष्ण भगवान के जीवन में दो चीजें काफी महत्वपूर्ण थीं, जिनमें बांसुरी और राधा थीं। भगवान श्रीकृष्ण जब भी बांसुरी बजाते तो राधा उन धुनों पर थिरकती थीं। जब भी कृष्ण बांसुरी बजाते राधा दौड़ी चली आती थीं। बांसुरी को राधा और श्रीकृष्ण के प्रेम का प्रतीक माना जाता है। 

Krishna Janmashtami 2019: story of lord krishna and radha
भगवान कृष्ण - फोटो : Social media

एक समय आया जब कृष्ण राधा से बिछड़ने लगे। क्योंकि कृष्ण के मामा कंस ने बलराम और कृष्ण को अपने यहां मथुरा आमंत्रित किया, जिसके बारे में जानकर वृंदावन के लोग दुखी हो गए। वृंदावन के लोग कभी नहीं चाहते थे कि बलराम और कृष्ण मथुरा जाएं। लेकिन भगवान श्रीकृष्ण कंस के वध के लिए जन्म लिया था। इसलिए उनको मथुरा जाना ही पड़ा। मथुरा जाने से पहले श्रीकृष्ण राधा से मिले और उन्होंने वादा किया कि वह लौट कर आएंगे। राधा ने भी उनसे वादा किया कि उनके मन में सदा कृष्ण ही बसे रहेंगे। वापस आने का वादा कृष्ण नहीं निभा पाएं और वो मथुरा से कभी नहीं लौट पाए। 

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Krishna Janmashtami 2019: story of lord krishna and radha
भगवान कृष्ण - फोटो : Social media

राक्षसों को मारने के बाद कृष्ण द्वारका चले गए और वहां उनकी शादी रूकमनी से हो गई। वहीं राधा की भी शादी हो चुकी थी। राधा के मन में हमेशा ही कृष्ण का वास रहा, लेकिन उन्होंने अपने पत्नी धर्म के सभी कर्तव्यों को निभाया। लेकिन एक वक्त पर सारी जिम्मेदारियों से मुक्त होकर जीवन के आखिरी दौर में वह कृष्ण से मिलने पहुंचीं। तब उन्हें कृष्ण और रूकमनी के विवाह का पता चला। राधा को द्वारका में कोई पहचान नहीं पाया तो वह भगवान श्रीकृष्ण के महल में शरणार्थी के तौर पर रहने लगीं और महल में काम करने लगीं। पर जब रादा के जीवन का अंत नजदीक आया तो उनसे रहा नहीं गया और भगवान श्रीकृष्ण को याद किया, जिसके बाद कृष्ण उनके सामने आ गए। 

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Krishna Janmashtami 2019: story of lord krishna and radha

जब कृष्ण राधा के सामने आए तो उन्होंने राधा से कुछ मांगने को कहा। तब राधा ने कृष्ण से आखिरी बार बांसुरी बजाने की इच्छा प्रकट की। राधा की इच्छा के मुताबिक श्रीकृष्ण ने बांसुरी ली और बेहद सुरीली धुन में बजाने लगे। बांसुरी की धुन सुनके ही राधा ने अपना शरीर त्याग दिया। लेकिन कृष्ण तब तक बजाते रहे जब तक राधा आध्यात्मिक रूप से कृष्ण में विलिन नहीं हो गई। भगवान श्रीकृष्ण राधा की मृत्यु को बर्दाश्त नहीं कर पाए और उनके प्रेम के प्रतीक बांसुरी को तोड़कर झाड़ी में फेंक दी। 

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