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देश के इन 10 पावन धामों पर विराजमान है हनुमान, दर्शन मात्र से ही बढ़ने लगता है सुख-समृद्धि और सम्मान
Fri, 19 Apr 2019 12:24 PM IST
Ayush Jha
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Ayush Jha
Updated Fri, 19 Apr 2019 12:24 PM IST
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bajrangi
सप्त चिरंजीवी में से एक श्री हनुमान जी की भक्ति कलयुग में तमाम दुखों को दूर करने वाली है। सनातन परंपरा में हनुमत भक्ति के बारे में मान्यता है कि जो कोई व्यक्ति पूरी श्रद्धा भाव से हनुमत स्तवन करता है, देवाधिदेव श्री बजरंग बली उसे अपनी उपस्थिति का अहसास जरूर कराते हैं। हनुमान जयंती को भगवान हनुमान के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है, हनुमान देवता को सबसे जल्दी प्रसन्न होने वाले देवताओं में माना जाता है। हनुमान जयंती एक हिन्दू पर्व है, यह चैत्र माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। हनुमान जी भगवान शिव के 11वें अवतार और रामजी के परम भक्त हैं।
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बेट द्वारका हनुमान दंडी मंदिर, गुजरात
गुजरात के समुद्री तट पर स्थित बेट द्वारका से 4 मील की दूरी पर स्थित है श्रीहनुमान जी का यह पावन धाम। इस मंदिर में बजरंगबली मकरध्वज के साथ मौजूद हैं। मान्यता है कि मंदिर में मकरध्वज की मूर्ति हनुमाजन जी के मुकाबले पहले छोटी हुआ करती थी, लेकिन अब दोनों मूर्ति एक समान ऊंची हो गई है। मान्यता यह भी है कि अहिरावण ने भगवान श्रीराम-लक्ष्मण को इसी स्थान पर छिपाकर रखा था। जब हनुमानजी श्रीराम-लक्ष्मण को लेने के लिए आए, तब उनका मकरध्वज के साथ घोर युद्ध हुआ। अंत में बजरंगबली ने उसे परास्त कर उसी की पूंछ से उसे बांध दिया।
गुजरात के समुद्री तट पर स्थित बेट द्वारका से 4 मील की दूरी पर स्थित है श्रीहनुमान जी का यह पावन धाम। इस मंदिर में बजरंगबली मकरध्वज के साथ मौजूद हैं। मान्यता है कि मंदिर में मकरध्वज की मूर्ति हनुमाजन जी के मुकाबले पहले छोटी हुआ करती थी, लेकिन अब दोनों मूर्ति एक समान ऊंची हो गई है। मान्यता यह भी है कि अहिरावण ने भगवान श्रीराम-लक्ष्मण को इसी स्थान पर छिपाकर रखा था। जब हनुमानजी श्रीराम-लक्ष्मण को लेने के लिए आए, तब उनका मकरध्वज के साथ घोर युद्ध हुआ। अंत में बजरंगबली ने उसे परास्त कर उसी की पूंछ से उसे बांध दिया।
Khammam hanuman temple
- फोटो : social media
जहां पत्नी के साथ मौजूद हैं हनुमत
भले ही उत्तर भारत समेत दुनिया भर में हनुमान जी की साधना-अराधना एक बाल ब्रह्मचारी के रूप में की जाती हो लेकिन तेलंगाना में हनुमान जी को विवाहित माना पूजा जाता है। हैदराबाद से 220 कि.मी की दूर खम्मम जिला में हनुमानजी और उनकी पत्नी का मंदिर है। इस पावन धाम में बजरंग बली और उनकी पत्नी सुवर्चला की प्रतिमा विराजमान है। मान्यता है कि हनुमानजी और उनकी पत्नी के दर्शन से वैवाहिक जीवन मे आ रही सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं।
भले ही उत्तर भारत समेत दुनिया भर में हनुमान जी की साधना-अराधना एक बाल ब्रह्मचारी के रूप में की जाती हो लेकिन तेलंगाना में हनुमान जी को विवाहित माना पूजा जाता है। हैदराबाद से 220 कि.मी की दूर खम्मम जिला में हनुमानजी और उनकी पत्नी का मंदिर है। इस पावन धाम में बजरंग बली और उनकी पत्नी सुवर्चला की प्रतिमा विराजमान है। मान्यता है कि हनुमानजी और उनकी पत्नी के दर्शन से वैवाहिक जीवन मे आ रही सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं।
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हनुमान धारा, चित्रकूट, उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में स्थित है हनुमाना धारा, जहां पूरे साल हनुमत भक्तों का तांता लगा रहता है। कहते हैं कि इसी स्थान पर पहली बार तुलसीदास जी को हनुमान जी के दर्शन हुए थे। यहां पहाड़ के सहारे हनुमान जी की एक विशाल मूर्ति स्थित है। जिनके ठीक सिर के पास दो जल के कुंड हैं, जिनमें हमेशा ही जल की धारा बहती रहती है। हनुमानजी को स्पर्श करते हुई जलधार को हनुमान धारा कहते हैं। मान्यता है कि जब लंका दहन करके हनुमान जी वापस चित्रकूट लौटे तो उनकी पूंछ में हो रही पीड़ा को शांत करने के लिए प्रभु श्रीराम ने अपने बाण के प्रहार से इस पवित्र जलधारा निकाली थी, जो आज तक उन्हें शीतलता प्रदान कर रही है।
उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में स्थित है हनुमाना धारा, जहां पूरे साल हनुमत भक्तों का तांता लगा रहता है। कहते हैं कि इसी स्थान पर पहली बार तुलसीदास जी को हनुमान जी के दर्शन हुए थे। यहां पहाड़ के सहारे हनुमान जी की एक विशाल मूर्ति स्थित है। जिनके ठीक सिर के पास दो जल के कुंड हैं, जिनमें हमेशा ही जल की धारा बहती रहती है। हनुमानजी को स्पर्श करते हुई जलधार को हनुमान धारा कहते हैं। मान्यता है कि जब लंका दहन करके हनुमान जी वापस चित्रकूट लौटे तो उनकी पूंछ में हो रही पीड़ा को शांत करने के लिए प्रभु श्रीराम ने अपने बाण के प्रहार से इस पवित्र जलधारा निकाली थी, जो आज तक उन्हें शीतलता प्रदान कर रही है।
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जहां नारी स्वरूप में मौजूद हैं हनुमान
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर से 25 कि. मी. दूर पर स्थित है बजरंगी का यह पावन धाम। रतनपुर नाम के इस स्थान को महामाया नगरी के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि विश्व में हनुमान जी का यह अकेला ऐसा मंदिर है जहां हनुमान नारी स्वरूप में मौजूद हैं।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर से 25 कि. मी. दूर पर स्थित है बजरंगी का यह पावन धाम। रतनपुर नाम के इस स्थान को महामाया नगरी के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि विश्व में हनुमान जी का यह अकेला ऐसा मंदिर है जहां हनुमान नारी स्वरूप में मौजूद हैं।