शनिदेव का नाम जेहन में आते ही अक्सर मन किसी अनिष्ट की आशंका से घबराने लगता है। शनि को यम, काल, दु:ख, दारिद्रय तथा मंद कहा जाता है। कुंडली और जीवन से शनिदोष दूर करने के लिए तमाम उपाय बताए गए हैं लेकिन इनमें सबसे अधिक प्रभावी हनुमत उपासना या हनुमत दर्शन है। मंगलवार और शनिवार के दिन श्री हनुमान जी का दर्शन, भजन, सुमिरन सभी प्रकार के कष्टों को दूर कर देता है। आइए आपको देश के उन तमाम सिद्ध हनुमान मंदिरों के बारे में बताते हैं, जिनके दर्शन मात्र से जीवन से जुड़े सभी दुख दूर हो जाते हैं और मनोकामनाएं पूरी होने लगती है।
बजरंगी के 10 पावन धाम: जहां दर्शन मात्र से ही दूर हो जाता है शनि दोष, बनने लगते हैं बिगड़े काम
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पटना का महावीर मंदिर
उत्तर भारत के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में पटना के महावीर मंदिर का नाम आता है। इस मंदिर कि मान्यता है कि यहां आकर दर्शन करने से आपके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और सभी मनोकामना पूरी होती है। इस मंदिर के अंदर रामसेतु का पत्थर रखा गया है, जो हमेशा पानी में तैरता रहता है। यहां मंगलवार और शनिवार के दिन सबसे ज्यादा श्रद्धालु आते हैं। हनुमान जी का भोग लगाने के लिए शुद्ध देसी धी से लड्डू बनाया जाता है। ऐसा लड्डू बाकी किसी तीर्थ स्थल पर नहीं मिलता है।
जहां पत्नी के साथ मौजूद हैं हनुमत
भारत के सभी राज्यों में भगवान हनुमान की पूजा और अराधना एक बाल ब्रह्मचारी के रूप में की जाती है लेकिन तेलंगाना में हनुमान जी की पूजा विवाहित के रूप में किया जाता है। हैदराबाद से 220 कि.मी की दूर खम्मम जिला में हनुमानजी और उनकी पत्नी का मंदिर है। इस पावन धाम में बजरंग बली और उनकी पत्नी सुवर्चला की प्रतिमा विराजमान है। मान्यता है कि हनुमानजी और उनकी पत्नी के दर्शन से वैवाहिक जीवन मे आ रही सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं।
गुजरात के समुद्री तट पर स्थित बेट द्वारका से 4 मील की दूरी पर स्थित है श्रीहनुमान जी का यह पावन धाम। इस मंदिर में बजरंगबली मकरध्वज के साथ मौजूद हैं। मान्यता है कि मंदिर में मकरध्वज की मूर्ति हनुमाजन जी के मुकाबले पहले छोटी हुआ करती थी, लेकिन अब दोनों मूर्ति एक समान ऊंची हो गई है। मान्यता यह भी है कि अहिरावण ने भगवान श्रीराम-लक्ष्मण को इसी स्थान पर छिपाकर रखा था। जब हनुमानजी श्रीराम-लक्ष्मण को लेने के लिए आए, तब उनका मकरध्वज के साथ घोर युद्ध हुआ। अंत में बजरंगबली ने उसे परास्त कर उसी की पूंछ से उसे बांध दिया।
हनुमान धारा, चित्रकूट, उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में स्थित है हनुमाना धारा, जहां पूरे साल हनुमत भक्तों का तांता लगा रहता है। कहते हैं कि इसी स्थान पर पहली बार तुलसीदास जी को हनुमान जी के दर्शन हुए थे। यहां पहाड़ के सहारे हनुमान जी की एक विशाल मूर्ति स्थित है। जिनके ठीक सिर के पास दो जल के कुंड हैं, जिनमें हमेशा ही जल की धारा बहती रहती है। हनुमानजी को स्पर्श करते हुई जलधार को हनुमान धारा कहते हैं। मान्यता है कि जब लंका दहन करके हनुमान जी वापस चित्रकूट लौटे तो उनकी पूंछ में हो रही पीड़ा को शांत करने के लिए प्रभु श्रीराम ने अपने बाण के प्रहार से इस पवित्र जलधारा निकाली थी, जो आज तक उन्हें शीतलता प्रदान कर रही है।