Bhadrapad Purnima Tithi 2024: भाद्रपद पूर्णिमा हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इस दिन चंद्रमा अपनी पूर्णिमा की अवस्था में होता है और इसे धार्मिक दृष्टिकोण से बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन दान करने से पुण्य मिलता है। भाद्रपद मास में आने वाली पूर्णिमा को विशेष महत्व दिया जाता है। आइए इस लेख में भाद्रपद पूर्णिमा 2024 की तिथि, महत्व और पूजा विधि के बारे में विस्तार से जानते हैं।
Bhadrapad Purnima 2024: भाद्रपद पूर्णिमा कब? जानें तिथि और मुहूर्त
भाद्रपद मास में आने वाली पूर्णिमा को विशेष महत्व दिया जाता है। आइए इस लेख में भाद्रपद पूर्णिमा 2024 की तिथि, महत्व और पूजा विधि के बारे में विस्तार से जानते हैं।
भाद्रपद पूर्णिमा 2024 की तिथि
द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल भाद्रपद पूर्णिमा 18 सितंबर 2024, बुधवार को है। पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 17 सितंबर 2024 को दोपहर 11 बजकर 44 मिनट से शुरू होगी और अगले दिन 18 सितंबर 2024 को सुबह 08 बजकर 04 मिनट पर इसका समापन होगा।
भाद्रपद पूर्णिमा का महत्व
- भाद्रपद पूर्णिमा का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है। इस दिन कई तरह के धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
- पितृ पक्ष: भाद्रपद मास में आने वाला पितृ पक्ष भी बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान पितरों का श्राद्ध किया जाता है और उन्हें पिंडदान किया जाता है। भाद्रपद पूर्णिमा को पितृ पक्ष का अंतिम दिन माना जाता है।
- भगवान विष्णु की पूजा: भाद्रपद पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु के सत्यनारायण रूप की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
- मां लक्ष्मी की पूजा: पूर्णिमा और शुक्रवार दोनों ही मां लक्ष्मी को प्रिय हैं। ऐसे में इस दिन देवी लक्ष्मी की उपासना करने से ऐश्वर्य, कीर्ति और संपन्नता में वृद्धि होती है।
सुबह जल्दी उठकर गंगा जल या किसी पवित्र नदी में स्नान करें। पूजा स्थल को साफ-सुथरा करके गंगाजल से छिड़कें। दीपक जलाकर भगवान विष्णु या मां लक्ष्मी की पूजा करें। भगवान विष्णु या मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें। इस दिन व्रत रखने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस दिन दान करने से पुण्य मिलता है।
भाद्रपद पूर्णिमा के दिन क्या करें?
इस दिन पवित्रता का विशेष ध्यान रखें। इस दिन सत्य बोलना बहुत जरूरी है। इस दिन दान करने से पुण्य मिलता है। इस दिन गुस्सा नहीं करना चाहिए। सकारात्मक विचारों को मन में रखें। इस दिन झूठ बोलने से बचना चाहिए। साथ ही किसी को दुख नहीं देना चाहिए। नकारात्मक विचारों से बचना चाहिए। अशुद्ध भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।